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अंटार्कटिका की बर्फीली पहाड़ियों के बीच बहता है खून भरा झरना, आज भी रहस्य

Sun, 19 Nov 2017 02:09 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला
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दुनियाभर में बहुत सी ऐसी जगह हैं, जो रहस्यों से भरी पड़ी हैं। इनमें से कई जगहों के रहस्यों को वैज्ञानिक आज तक भी सुलझा नहीं पाए हैं। ऐसा ही एक रहस्य अंटार्कटिका का टेलर ग्लेशियर है। इस ग्लेशियर से बहते एक झरने से खून की तरह लाल पानी बहता है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने इस पर कई शोध किए, लेकिन कोई निश्चित नतीजा नहीं निकाल पाए।
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सदियों से इस झरने के पानी का रंग लाल है। जिस जगह यह झरना है, वहां का तापमान हमेशा माइनस में रहता है, लेकिन झरना फिर भी बहता रहता है। पहली बार साल 1911 में ऑस्‍ट्रेलिया के जियोलॉजिस्‍ट ग्रिफिथ टेलर ने यहां आने की हिम्‍मत की और उन्‍होंने देखा कि यहां तो खूनी वाटर फॉल गिर रहा है। उन्हें पहले लगा कि ये लाल रंग माइक्रोस्कोपिक लाल शैवल की वजह से है मगर साल 2003 में टेलर की शैवाल वाली थ्‍योरी को गलत साबित कर दिया गया।

नई रिसर्च में सामने आया था कि इस पानी में आयरन ऑक्साइड की भरपूर मात्रा है। इसकी वजह से यहां पानी का रंग लाल हो जाता है। कुछ लोगों ने इसे सच भी मान लिया। लेकिन कुछ शोधकर्ताओं को इस शोध पर भी विश्वास नहीं हुआ, तो उन्‍होंने दो कदम आगे जाकर नया शोध किया। कोलोराडो कॉलेज और अलास्का यूनिवर्सिटी ने अपने शोध में पाया कि पानी दरअसल एक बेहद विशालकाय तालाब से गिर रहा है।
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खास बात यह है कि ये तालाब पिछले कई लाख सालों से बर्फ के नीचे दबा हुआ था। पानी जैसे-जैसे जमना शुरू होता है, वो गर्मी छोड़ता है। यही गर्मी चारों तरफ जमी बर्फ को गर्म करती है। इस प्रक्रिया की वजह से इस झरने से लगातार पानी बह रहा है।

कुछ लोगों का तो यहां तक विश्वास है कि यहां पर ‌‌‌कोई आत्मा रहती है। इस आत्मा की वजह से ही पानी का रंग लाल है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यहां के पानी के अंदर आयरन आक्साईड होता है, जो हवा के संपर्क में आकर पानी को लाल बना देता है। उनका अनुमान है कि इस जगह बर्फ के नीचे लौह तत्व की अधिकता है, जो पानी को लाल रंग देती है। हालांकि यह लाल झरना अभी भी रहस्य बना हुआ है।
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