बांद्रा के एक पॉश कॉफी शॉप में करीब आधे घंटे तक डूब कर अपनी फिल्मों और कैरियर पर बातचीत करने के बाद जब बिपाशा बसु कुर्सी से खड़ी होती हैं तो उनके मुंह से सहज ही निकल पड़ता है, ‘अब तो डेफिनेटली बॉक्स ऑफस चाहिए।’
उनके चेहरे पर चिंता की हल्की लकीरें खिंच जाती हैं। वह कॉफी शॉप की विंडो से आसमान में ऐसे देखती हैं जैसे कड़ी धूप में कोई नीली छतरी वाले से एक छायादार बादल मांगता है।
हर ऐक्टर के कैरियर में ऐसा दौर आता है जब कामयाब होने के बावजूद सफलता उसके कदम नहीं चूम रही होती। वह कामयाब कहलाते रहने के लिए सफलता पाने को बेताब होता है। बिपाशा बसु ठीक उसी जगह पर खड़ी हैं।
वह जानती हैं कि नई पीढ़ी के निर्देशक और नायिकाएं तेजी से आ रही हैं। पुरानी हीरोइनों के लिए जगह बनाए रखना हर दिन कठिन हो चला है। बावजूद इसके कि सिनेमा बदल रहा है और हीरोइन की उम्र अब पहले की तरह मायने नहीं रखती।
फिर भी बिपाशा दम साध कर आज रिलीज हो रही अपनी फिल्म ‘क्रीचर 3डी’ के नतीजे का इंतजार कर रही हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि प्रशंसक उन्हें इस बार निराश नहीं करेंगे।
‘क्रीचर 3डी’ के बाद क्या करेंगी बिपाशा?
35 वर्ष की हो चुकीं बिपाशा को फिल्म इंडस्ट्री में करीब डेढ़ दशक हो रहा है। इतने लंबे अर्से में निःसंदेह वह अपने दम पर आगे बढ़ी हैं। ऐसे दौर में जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी हीरोइनें बॉलीवुड के खान, कुमार और चोपड़ा ब्रांड के नायकों-निर्माताओं का हाथ थाम कर आगे बढ़ती रही हैं, बिपाशा अपनी शर्तों पर अपने मन का काम करती रही हैं।
फिल्म अजनबी (2001) में उन्होंने नेगेटिव केरेक्टर के साथ शुरुआत का जोखिम लिया था, वह अभी तक जारी है। ‘जिस्म’ (2003) जैसी फिल्म के बाद भले ही लोगों ने उन्हें ‘सेक्स सिंबल’ मानना शुरू कर दिया, परंतु उन्होंने इस बोल्ड इमेज में बंधना स्वीकार नहीं किया और हर किस्म के रोल करती गईं।
थ्रिलर, ऐक्शन और कॉमेडी भूमिकाओं से लेकर उन्होंने ‘अपहरण’ और ‘कारपोरेट’ जैसी फिल्मों में संजीदा भूमिकाएं भी निभाईं। आइटम डांस से भी उन्होंने परहेज नहीं किया। इस बीच वह अपनी जिंदगी को लेकर भी हमेशा सुर्खियों में बनी रहीं। लेकिन कैरियर के शुरुआती वर्षों में लोकप्रियता का जो शिखर उन्होंने छुआ था, वह बाद के दौर में लगातार नीचे आता गया।
नतीजा यह निकला कि बीते कुछ वर्षों में ‘रेस 2’ और ‘राज 3’ को छोड़ दें तो कई बार बिपाशा की फिल्में आईं और दर्शकों को पता तक नहीं चला। शायद इसी का परिणाम है कि ‘क्रीचर 3डी’ के बाद बिपाशा के हाथों में केवल एक ही फिल्म है, अलोन।
‘क्रीचर 3डी’ की कहानी
बिपाशा फिर से लोकप्रियता का पुराना शिखर छूना चाहती हैं और ‘क्रीचर 3डी’ बॉक्स ऑफिस पर उनकी बड़ी लड़ाई है। निर्देशक विक्रम भट्ट की इस फिल्म में बिपाशा अब तक अनदेखे-अनजाने जानवर से लड़ती हैं, आधा पशु और आधा इंसान जैसा है।
जिसे ब्रह्मराक्षस बताया जा रहा है। बिपाशा कहती हैं, ‘यह हॉरर कम और एडवेंचर फिल्म ज्यादा है। यह कहानी आहना की है, जो आत्मनिर्भर है। अकेली है। वह एक छोटे-से जंगल में एक लॉज खोलती है और बैंक लोन लेकर जिंदगी भर की कमाई उसमें लगा देती है। तभी वहां पर अजीबोगरीब चीजें होने लगती हैं।
लोग कहते हैं कि यह जगह ठीक नहीं है, उसे हट जाना चाहिए लेकिन वह अपनी जिंदगी दांव पर लगा देती है।’ बिपाशा मान रही हैं कि जुरासिक पार्क जैसी हॉलीवुड फिल्मों के दर्शकों के साथ मिल कर उनके फैन्स भी सिनेमाघरों में पहुंचे तो बड़ी सफलता निश्चित है।
अपने फैन्स के दम जीतेंगी बिपाशा
यह भारत की पहली ‘क्रीचर फिल्म’ है। जिसमें धरती पर अनदेखा-अनजाना जीव लोगों की जान के लिए खतरा बन जाता है। असल में तकनीकी दृष्टि से यह मजबूत फिल्म है।
3डी तकनीक में दर्शकों को ब्रह्मराक्षस से बिपाशा की यह लड़ाई रोमांचित कर सकती है क्योंकि सब कुछ आंखों के सामने ‘लाइव’ जैसा नजर आएगा। बिपाशा के पक्ष में यह बात जाती है कि इन दिनों नायिका प्रधान फिल्में टिकट खिड़की पर पैसा वसूल साबित हो रही हैं। परंतु बॉक्स ऑफिस के बारे में कभी कोई दावा नहीं किया जा सकता।
हिंदी फिल्मों की कहानियों के अनुभव से इतना तो कहा जा सकता है कि पर्दे पर बिपाशा ब्रह्मराक्षस के हाथों तो बच जाएंगी, लेकिन बॉक्स ऑफिस की जंग वह अपने चाहने वालों के बगैर नहीं जीत सकेंगी। बिपाशा जानती हैं कि जीतेंगी, तभी बचेंगी। यही हर दौर की कड़वी सच्चाई है। सब पर लागू होती है।