जन लोकपाल आंदोलन को लेकर चर्चा में आए समाजसेवी अन्ना हजारे एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार चर्चा का कोई राजनैतिक कारण नहीं, बल्कि नसीरुद्दीन शाह की आने वाली फिल्म 'चार्ली के चक्कर में' है, जिस पर सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जाहिर की है।
सेंसर बोर्ड ने फिल्म निर्माताओं से फिल्म में अन्ना हजारे से जुड़े संदर्भ को हटाने के लिए कहा है। लेकिन फिल्म निर्माता यह मानने के लिए तैयार नहीं है। सेंसर बोर्ड के मुताबिक अन्ना हजारे का फिल्म में इस तरह प्रयोग नहीं किया जा सकता। जबकि फिल्म निर्माता करन अरोरा का कहना है कि उनकी फिल्म ड्रग्स के कारोबार और एडल्ट मामलों पर आधारित है। इसके लिए हमने पहले बोर्ड से 'ए' सर्टिफिकेट की मांग की है। फिर इसमें कैसी आपत्ति?
निर्माता करन अरोरा ने कहा कि वह इस मसले को लेकर फिर से केंद्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड के पास जाएंगे और अपना पक्ष रखकर अन्ना हजारे संदर्भ को फिल्म से न हटवाने के बारे में बात करेंगे। लेकिन खास बात यह हे कि फिल्म रिलीज को अब केवल एक सप्ताह बाकी हैं। ऐसे में नये सिरे से सेंसर प्रक्रिया पूरी करने में फिल्म समय पर रिलीज न हो पाने के भी आसार हैं। अगली स्लाइड में जानिए, क्या है वो अन्ना हजारे का मामला।
क्यों अन्ना हजारे का नाम फिल्म से हटवाना चाहता है बोर्ड
सेंसर बोर्ड की एक्जामिन कमेटी ने फिल्म के एक संवाद से कुछ शब्द हटाने के लिए कहा है। इस संवाद में अन्ना हजारे का नाम आया है। संवाद कुछ इस तरह है, 'तुमको क्या जरूरत थी इतना सच बोलने की। क्या अन्ना हजारे ने तुमको कहा कि ये काम कर के आओ?' फिल्म निर्माताओं के मुताबिक इसमें अन्ना हजारे के अपमान करने का इरादा नहीं है, न ही फिल्म वहां अन्ना के अपमान जैसा कोई प्रसंग है। लेकिन सेंसर बोर्ड मानने को तैयार नहीं है।
इसके अलावा भी फिल्म में 10 से अधिक ऐसे शब्द है जिन्हें सेंसर बोर्ड म्यूट कराना चाहता है। साथ ही एक दृश्य में लड़की ड्रग लेते हुए दिखाया गया है। उसे भी सेंसर बोर्ड फिल्म से हटाने के लिए बोल रहा है। हालांकि सेंसर बोर्ड को फिल्म दिखाए गए लड़कों के ड्रग्स लेने के दृश्यों से कोई आपत्ति नहीं है।
निर्माता करन आरोरा बताते हैं कि अन्ना हजारे का नाम फिल्म के ऐसे हिस्से में जहां से उसे हटाने पर फिल्म प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने सवाल खड़ा किया है कि अन्ना का नाम हटा देने पर फिल्म में बचेगा ही क्या। हालांकि करन ये भी जोड़ा कि वह अपने बुरे दिनों के लिए तैयार हैं। वह सेंसर बोर्ड के पास फिर से सर्टिफिकेट के लिए जाएंगे।