बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार अमिताभ बच्चन ने कई वर्षों पहले व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। अब अदालत ने उन्हें निर्देश दिया है कि अगर वह इस मुकदमे को आगे बढ़ाना चाहते हैं और संस्थाओं के साथ समझौता नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें कोर्ट में पेश होना होगा।
क्या है पक्षों की दलील?
जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की बेंच ने शुक्रवार को यह निर्देश तब जारी किया जब पक्षों ने कोर्ट को बताया कि 2022 में कोर्ट ने एकतरफा आदेश देकर बच्चन के पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की थी। उन्होंने आगे बताया कार्यवाही के दौरान पक्षों ने बातचीत के जरिए आपसी समझौते की संभावना तलाशी थी।
अमिताभ बच्चन
- फोटो : सोशल मीडिया
क्यों मांगा गया अतिरिक्त समय?
पक्षों ने आगे बताया कि कुछ प्रतिवादियों के साथ आपसी समझौता हो गया था, मगर बच्चन की तरफ से कुछ व्यवहारिक दिक्कतों के कारण समझौते के एग्रीमेंट पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर नहीं हो सके। इसलिए, अमिताभ बच्चन के वकील ध्रुव आनंद ने जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने और एग्रीमेंट को रिकॉर्ड पर लाने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।
अदालत ने जारी किया निर्देश
16 नवंबर तक का समय देते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर समझौता अधूरा रहता है या नहीं हो पाता है, और अभिनेता मुकदमे में उठाए गए किसी भी दावे या मुद्दे को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।
अमिताभ बच्चन
- फोटो : सोशल मीडिया
क्या है अमिताभ बच्चन का मामला?
- साल 2022 में अमिताभ बच्चन ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए मुकदमा दायर किया था।
- मुकदमे में कहा गया था कि मोबाइल एप्लिकेशन डेवलपर्स बच्चन के नाम, तस्वीर और आवाज का इस्तेमाल 'कौन बनेगा करोड़पति' (KBC) के साथ अवैध रूप से जोड़कर लॉटरी आयोजित करने के लिए कर रहे थे।
- उन्होंने बुक पब्लिशर्स, टी-शर्ट बेचने वालों और कई अन्य व्यवसायों के खिलाफ भी रोक लगाने का आदेश मांगा था।
- उस साल नवंबर में, अदालत ने एक अंतरिम आदेश जारी किया, जिसमें लोगों को बच्चन के पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी अधिकारों का उल्लंघन करने से रोका गया।
- जस्टिस चावला ने कहा, 'वादी को अपूरणीय नुकसान और हानि होने की आशंका है। कुछ गतिविधियों से उनकी बदनामी भी हो सकती है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए, एकतरफा अंतरिम आदेश जारी किया जाता है।'