दक्षिण भारतीय फिल्मों से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाले अभिनेता का कहना है कि ‘सिनेमा का एक आज्ञाकारी शिष्य’ बने रहने से उन्हें तीन दशकों तक सिनेमा जगत में प्रासंगिक रहने में मदद मिली।
अनिल ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा, ‘मुझे लगता है कि यह चयन, किस्मत और परिवार तीनों का ही मेल है। सही समय पर, सही पटकथा और निर्देशक मेरे पास आए और मैंने सही निर्णय लिया और फिर मेरे परिवार ने।’
उन्होंने कहा, ‘घर पर मेरे संबंध सभी से दोस्ताना है, इसलिए मुझे क्या सही है और क्या गलत यह जानने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता।’
‘रेस 3’ के अभिनेता का कहना है कि वह भविष्य में ‘और भाषाएं सीखना चाहते हैं, अपनी संवाद अदायगी में सुधार करना चाहते हैं और नए निर्देशकों के साथ काम करना चाहते हैं।’
अनिल के इस शानदार फिल्मी सफर की शुरुआत साल 1983 में 23 जून को ही हुई थी, जब बतौर लीड उनकी पहली फिल्म 'वो 7 दिन' रिलीज हुई थी।