सत्तर के दशक में पर्दे पर आते ही अमिताभ की जुबान से जैसे पहला वाक्य निकलता और पूरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता था। फिल्में रिलीज हुए बरसों बीत चुके मगर उनके डॉयलाग लोगों को आज भी याद हैं। आज हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं अमिताभ के दस चुने डॉयलाग। जो आज भी न सिर्फ लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं बल्कि हम मुहावरों की तरह इन्हें जब-तब इस्तेमाल भी करते रहते हैं।
हम भी वो हैं जो कभी किसी के पीछे खड़े नहीं होते, जहां खड़े हो जाते हैं लाइन वहीं शुरु होती है...- कालियाविजय दीनानाथ चौहान पूरा नाम, बाप का नाम दीनानाथ चौहान, मां का नाम सुहासिनी चौहान, गांव मांडवा, उमर 36 साल, नौ महीना आठ दिन सालवां घंटा चालू है - अग्निपथहां, मैं साइन करूंगा, लेकिन... जाओ पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ जिसने मेरे हाथ में ये लिख दिया था, उसके बाद ..... - दीवारदैट आई कैन अंग्रेज लीव बिहाइंड, आई कैन टॉक इंग्लिश, आई कैन वॉक इंग्लिश, आई कैन लॉफ इंग्लिश, बिकोज इंग्लिश इज ए वैरी फन्नी लैंग्वेज - नमक हलालजब तक बैठने का ना कहा जाए शराफत से खड़े रहो, ये पुलिस स्टेशन है, तुम्हारे बाप का घर नहीं, इसीलिए सीधी तरह खड़े रहो - जंजीरतुम लोग मुझे ढूंढ रहे हो और मैं तुम्हारा यहां इंतजार कर रहा हूं... इसे अपनी जेब में रख ले पीटर, अब ये ताला मैं तेरी जेब से चाबी निकाल कर ही खोलूंगा - दीवारमूछें हो तो नत्थूलाल जैसी, वरना ना हों -शराबीडॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है - डॉनतुम्हारा नाम क्या है... बसंती - शोलेमैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता - दीवार