आर्यमान सेठी परिवार के साथ
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मुझे एंग्जायटी अटैक आते थे
आर्यमान ने आगे बताया कि चोट के बावजूद मैं अगले साल फिर वहां गया और तब मैं दसवीं कक्षा में था। इसलिए मुझे पढ़ाई भी खूब करनी पड़ी। मैं ठीक से खेल नहीं पा रहा था, क्योंकि मैं अभी भी सर्जरी से उबर रहा था। अपने आस-पास के सभी लोगों को उस उम्र में तेजी से और मजबूत होते देखकर, जब ऐसा होना चाहिए, मैं पीछे जा रहा था। मैं उनसे तालमेल नहीं बिठा पा रहा था। वह सपना टूट जाने के बाद मैं डिप्रेशन में चला गया। मुझे पैनिक अटैक आते थे, एंग्जायटी अटैक आते थे, मेरे हाथ कांपते थे, मुझे इतने गंभीर डिप्रेशन के दौरे पड़ते थे कि मैं अपने कमरे से बाहर तक नहीं निकलता था और सारा दिन वहीं पड़ा रहता था। लंदन मेरे लिए बहुत कठिन था।
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परिवार ने दिया मेरा साथ
हालांकि, ऐसे मुश्किल वक्त में भी आर्यमान का परिवार उनके साथ खड़ा रहा। उन्होंने बताया कि डिप्रेशन में दिलासा देने से मदद नहीं मिलती, केवल उस व्यक्ति के साथ समय बिताने से ही मदद मिलती है। आप सभी ने मेरे साथ समय बिताया है। मां ने सबसे अधिक सहयोग दिया है। मुझे अपने माता-पिता दोनों से ही असफल होने का डर मिला था। हर साल जब मेरा जीवन स्थिर नहीं होता था, तो मेरी हालत और खराब होती जाती थी।
एक समय ऐसा आया जब मैं इतना हताश हो गया कि सोचने लगा कि कुछ भी चलेगा, कुछ भी काम कर लूंगा। तभी मुझे एहसास हुआ कि मैं संगीत ही करना चाहता हूं और अगर मैं इसे करता रहूं तो खुश रहूंगा। अब मुझे डिप्रेशन नहीं है, जो बहुत अच्छी बात है। अब पैनिक अटैक भी नहीं आते। अर्चना पूरन सिंह और परमीत सेठी ने 1992 में शादी की थी। अब कपल दो बेटों आर्यमन सेठी और आयुष्मान सेठी के माता-पिता हैं।