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काकीनाडा: सियासी बॉक्स ऑफिस पर दक्षिण के सुपर स्टार का कड़ा इम्तिहान; इन उम्मीदवारों के बीच है त्रिकोणीय लड़ाई

Fri, 10 May 2024 07:54 AM IST
शिव शरण शुक्ला बविंद्र वशिष्ठ

सार

काकीनाडा के कुंभाभिषेकम तट पर 30 साल से मछली पकड़ रहे छोड़पल्ली श्रीनून कहते हैं, आंध्र में बदलाव जरूरी है। रोज दो-तीन सौ रुपये कमा पाते हैं। परिवार का गुजारा मुश्किल हो रहा है। मछुआरों के लिए योजना के तहत सरकार से कुछ पैसे मिलते हैं, लेकिन महंगाई आसमान छू रही है।
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अमर उजाला ग्राउंड रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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तटीय आंध्र के पूर्वी गोदावरी इलाके के पेदापुरम में युवाओं की टोलियां निकल रहीं हैं। शाम पांच बजे सांवरलकोटा में भारी पुलिस बल के बीच चौराहे पर भीड़ जमा हो रही है। फिल्मी गानों पर युवा डांस कर रहे हैं। आठ बजे तक चौराहे के चारों ओर हजारों की भीड़ है। सवा आठ बजे फिल्मस्टार व जन सेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण के पहुंचते ही कई युवा छतों- खंभों पर चढ़ जाते हैं। हाथ मिलाने के लिए बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश करते हैं। रात 10 बजे तक चली इस चुनावी सभा में भीड़ का जोश घंटों यूं ही रहता है। दक्षिण के इस सुपरस्टार की चुनावी सभाओं में ऐसे ही लोग उमड़ रहे हैं, लेकिन सियासी अखाड़े में उनका इस बार कड़ा इम्तिहान है।

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विरोधी दल के नेता सकते में हैं, लेकिन कह रहे हैं युवा फिल्म स्टार को देखने आते हैं, ये इन्हें वोट नहीं देते। तर्क है कि पवन कल्याण 2014 से चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन आज तक इन्हें जीत नहीं मिली। पिछला चुनाव वह दो जगह से लड़े थे और दोनों जगह हार गए। पवन की चुनावी सभाओं में भीड़ देखकर एनडीए उत्साहित है, लेकिन खुद पवन आशंकित हैं। यही वजह है कि सांवरलकोटा सभा में एक युवक ने जब पवन के सामने शर्ट खोलकर हवा में उछाली, तो जन सेना प्रमुख मंच से बोले, यह जोश मतदान केंद्र पर भी दिखाना होगा। मैं राजनीति में संघर्ष कर रहा हूं। मैंने जीत नहीं देखी। वोट देकर मेरी जीत भी सुनिश्चित करें।

काकीनाडा से जन सेना ने इस बार पेशे से इंजीनियर व कारोबारी उदय श्रीनिवास तंगेला को उतारा है। उदय 35 करोड़ के टी-टाइम फ्रेंचाइजी आउटलेट के मालिक हैं। उधर, सूबे में सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी ने पिछला चुनाव टीडीपी से लड़ने वाले चालमालासेट्टी सुनील को प्रत्याशी बनाया है। वर्तमान में यहां से बंगा गीता विश्वनाथ वाईएसआरसीपी की सांसद हैं। कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एमएम पल्लम राजू को मैदान में उतार कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। राजू यहां से तीन बार सांसद रह चुके हैं। काकीनाडा लोकसभा सीट इसलिए भी पवन कल्याण की प्रतिष्ठा से जुड़ी है, क्योंकि जिस विधानसभा हलके पिठापुरम से वह चुनाव मैदान में हैं, वह भी इसी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। टीडीपी व भाजपा के साथ गठबंधन में जन सेना आंध्र प्रदेश की 25 में से दो ही लोकसभा सीटों पर लड़ रही है। एक काकीनाडा और दूसरी मछलीपटनम।
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महंगाई, बेरोजगारी और घटिया शराब भी मुद्दा
काकीनाडा के कुंभाभिषेकम तट पर 30 साल से मछली पकड़ रहे छोड़पल्ली श्रीनून कहते हैं, आंध्र में बदलाव जरूरी है। रोज दो-तीन सौ रुपये कमा पाते हैं। परिवार का गुजारा मुश्किल हो रहा है। मछुआरों के लिए योजना के तहत सरकार से कुछ पैसे मिलते हैं, लेकिन महंगाई आसमान छू रही है। घटिया शराब महंगे दाम पर दी जा रही है। समुद्र में रिलायंस का प्रोजेक्ट लगने के बाद मछलियां मर रहीं हैं। 

डोडीगोंट गांव के राम बाबू का कहना है कि मुकाबला कड़ा है। सीएम जगन ने भी अच्छी स्कीमें दी हैं, लेकिन महंगाई से लोग परेशान हैं। इसी गांव के पहली बार मतदान करने जा रहे मणिकटा ने कहा, युवाओं के लिए नौकरी नहीं है। पवन कल्याण ने उम्मीद जगाई है।

कापू समुदाय का प्रभाव
काकीनाडा समेत पूर्वी व पश्चिमी गोदावरी इलाके में कापू समुदाय का खासा प्रभाव है। पवन कल्याण इसी समुदाय से आते हैं। वह खुद को कापू के प्रतिनिधि के रूप में पेश कर रहे हैं। ऐसे में प्रतिद्वंद्वी दलों ने भी जातिगत समीकरणों को देख प्रत्याशी उतारे हैं। वाईएसआरसीपी के चालमालासेट्टी सुनील भी कापू हैं। आंध्र की  राजनीति में कम्मा, कापू और रेड्डी समुदायों की अहम भूमिका रहती है। काकीनाडा जिले में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। लिंगानुपात 1,000 पुरुषों पर 1,007 महिलाएं हैं। अनुसूचित जाति के 15.82 फीसदी लोग और अनुसूचित जनजाति के 1.47 फीसदी लोग रहते हैं।

कांग्रेस का रहा दबदबा, भाजपा भी खिला चुकी कमल
काकीनाडा लोकसभा सीट पर 1952 में सीपीआई के बाद 1957, 1962, 1967, 1971, 1977 व 1980 में कांग्रेस ने जीत हासिल की। 1984 में पहली बार टीडीपी जीती। 1989 में फिर से कांग्रेस ने जीत दर्ज की। वर्ष 1991, 1996 में टीडीपी फिर से जीती, लेकिन कांग्रेस व टीडीपी के विजयरथ को भाजपा ने 1998 में रोक दिया। भगवा पार्टी ने इस सीट पर पहली बार जीत हासिल की। 1999 में दोबारा टीडीपी ने कब्जा जमाया। इसके बाद कांग्रेस 2004 और 2009 में कांग्रेस जीती, लेकिन वह 2014 में टीडीपी से हार गई। 2019 में पहली बार वाईएसआर कांग्रेस ने विजय पताका फहराई।

पिछले दो चुनावों का हाल
2019
उम्मीदवार दल मत%
वंगा गीता विश्वनाथ वाईएसआरसीपी 43.47
चालमालासेट्टी सुनील टीडीपी     41.39

2014
उम्मीदवार  दल मत%
थोटा नरसिम्हम  टीडीपी     46.69
चालमालासेट्टी सुनील वाईएसआरसीपी 46.45

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