प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राजस्थान की जिस बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट पर जनसभा की है, उस पर कभी भाजपा, तो कभी कांग्रेस को जीत मिलती रही है। इस सीट पर 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में जीत हासिल कर चुकी भाजपा ने एक बार फिर वर्तमान सांसद और मंत्री कैलाश चौधरी पर भरोसा जताया है। लेकिन कैलाश चौधरी की जीत की राह में सबसे बड़ा रोड़ा रविंद्र सिंह भाटी को माना जा रहा है, जो पूर्व में भाजपा में ही रहे हैं, लेकिन जब विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, तो वे बगावत करते हुए विधानसभा चुनाव में उतर गए और जबरदस्त जीत हासिल की। अब वे लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को पटखनी देने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, लोकसभा चुनाव क्षेत्र के बड़े आकार और पूरा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आसपास सिमटने के कारण उनकी चुनौती आसान नहीं मानी जा रही है।
राजपूत समाज की भाजपा से कथित नाराजगी और युवाओं के बीच अपनी लोकप्रियता के बल पर चुनाव लड़ रहे रविंद्र सिंह भाटी चुनाव जीतने की स्थिति में हैं या नहीं, यह कहना मुश्किल है। लेकिन इतना तय है कि वे जितना भी वोट काटेंगे, वह भाजपा का ही होगा। भाजपा उम्मीदवार कैलाश चौधरी और कांग्रेस उम्मीदवार उमेदाराम बेनीवाल के बीच नजदीकी मामला होने पर रविंद्र सिंह भाटी को मिलने वाले एक-एक वोट वोट भाजपा के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं।
रविंद्र सिंह भाटी की इसी कीमत को समझते हुए भाजपा नेता मदन राठौड़ ने कहा है कि वह उनका ही नेता था, जो बिगड़ कर दूसरी राह चला गया। हालांकि, इसके बाद भी राठौड़ का अनुमान है कि भाटी जीत नहीं हासिल कर सकेंगे। उन्हें उम्मीद है कि भाजपा एक बार फिर राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत हासिल कर मोदी को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनाने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाड़मेर के अपने संबोधन में जिस तरह इस इलाके को कच्छ की तरह विकसित करने की बात कही है, वह भी अपना असर दिखा सकती है।
मनीष कश्यप बनेंगे किसकी परेशानी?
यूट्यूबर मनीष कश्यप बिहार की पश्चिमी चंपारण लोकसभा सीट पर भाजपा के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं। भाजपा उम्मीदवार संजय जायसवाल इस सीट पर तीन बार लगातार जीत हासिल कर चुके हैं। वे चौथी बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। लेकिन मनीष कश्यप की लोकप्रियता भाजपा के वोटों में सेंध लगा सकती है। नजदीकी मामला होने पर मनीष कश्यप को मिले वोट भाजपा उम्मीदवार के लिए मुश्किल का सबब बन सकते हैं।
पप्पू यादव जीतेंगे या हराएंगे?
पप्पू यादव ने कांग्रेस ज्वाइन करते समय अपनी पार्टी का विलय भी कर दिया था। अब वे अपना आगे का राजनीतिक भविष्य कांग्रेस के साथ ही देख रहे थे। लेकिन सीटों के समझौते में उनकी पूर्णिया की सीट राजद के खाते में चले जाने से पप्पू यादव के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई है। अब वे कांग्रेस नेता होते हुए भी स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर पूर्णिया से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
उनकी सबसे बड़ी चुनौती इंडिया गठबंधन में शामिल राजद की उम्मीदवार बीमा भारती के लिए होगी। एनडीए की ओर से जेडीयू उम्मीदवार संतोष कुशवाहा यहां से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पप्पू यादव के कारण राजद को भी अपना नुकसान समझ में आ रहा है। इसी को देखते हुए उन्होंने इशारों में ही पप्पू यादव पर हमला बोला है। मजबूत और लोकप्रिय उम्मीदवार पप्पू यादव इस सीट पर स्वयं भी जीत हासिल कर सकते हैं। यदि उन्हें जीत नहीं मिलती है, तो उनको मिलने वाले वोट राजद-जदयू उम्मीदवारों के किस्मत का फैसला करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।
इन स्वतंत्र उम्मीदवारों ने भी बढ़ाई मुश्किल
भाजपा कर्नाटक में अपनी बढ़त बरकरार रखने की कोशिश में है। लेकिन इसी बीच उसके नेता केएस ईश्वरप्पा ने शिवमोगा सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर नामांकन कर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वे पार्टी के ही नेता विजयेंद्र के विरोध में लगातार अपनी आवाज उठा रहे थे।