शताब्दी को इस बार कई मुश्किलें झेलनी पड़ी रही हैं। पार्टी से उनका तालमेल दुरुस्त नहीं है। जिला अध्यक्ष अनुब्रत मंडल से उनकी कभी नहीं बनी, हालांकि अनुब्रत के गो तस्करी में तिहाड़ जाने के बाद शताब्दी को राहत है। लगातार तीन बार से सांसद होने के बाद भी अपेक्षित विकास न होने से जनता भी उनसे नाराज है। हालांकि आखिरी वक्त में भाजपा का प्रत्याशी बदल जाने से पार्टी में मची अफरातफरी उनके पक्ष में जाती है।
कांग्रेस ने मिल्टन रशीद पर लगाया दांव
भाजपा ने पूर्व आईपीएस अधिकारी देबाशीष धर को मैदान में उतारा था, लेकिन तकनीकी आधार पर उनका नामांकन ही रद्द कर दिया गया। वे राज्य सरकार से नो ड्यूज प्रमाणपत्र नहीं पा सके। देबाशीष काफी पहले से ही चुनावी तैयारियों में जुटे हुए थे। यह झटका धर ही नहीं, भाजपा के लिए भी था। बहरहाल, धर की जगह भाजपा ने संगठन से देबतनु भट्टाचार्य को आखिरी समय में उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने मिल्टन रशीद को मैदान में उतारा है। यहां तृणमूल कांग्रेस और भाजपा में कांटे की टक्कर है।
क्या है मतदाताओं का रुख
शांतिनिकेतन स्थित गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के विश्वविद्यालय विश्वभारती में हल्की-फुल्की चुनावी चुहल दिखती है। संथाली भाषा विभाग के छात्रों से बातचीत में पता चलता है कि वे भ्रष्टाचार से सबसे ज्यादा परेशान हैं। वे विकास को प्राथमिकता देने वाली पार्टी को पसंद करते हैं।
बीरभूम जिले का प्रशासनिक मुख्यालय सिउड़ी है। यहां बस स्टैंड के पास मिले अधेड़ देबोजीत मजूमदार कहते हैं कि मोदी का हवा है। दीदी ने कोई विकास नहीं किया है। राम मंदिर की लहर चलती दिख रही है। यहां के बाजारों में भाजपा के कम और रामछपे व जय श्रीराम लिखे भगवा झंडे ज्यादा दिखते हैं। तृणमूल के ब्लॉक अध्यक्ष लाला प्रशांटो प्रसाद दावा करते हैं कि राम मंदिर फ्लॉप कर गया। राज्य की योजनाओं का पैसा केंद्र ने रोक रखा है। पार्टी दफ्तर में मिले मो. असलम कहते हैं कि लोख्खी (लक्ष्मी) भंडार (योजना) का बहुत असर है। मैं किसी को भी वोट दूं, लेकिन हमारे घर की औरतें दीदी को ही वोट देंगी।
पिछले दो लोकसभा चुनाव के नतीजे
| लोकसभा चुनाव 2019 |
| उम्मीदवार |
दल |
मत% |
| शताब्दी रॉय |
तृणमूल |
45.11 |
| दुधकुमार मंडल |
भाजपा |
38.97 |
| लोकसभा चुनाव 2014 |
| उम्मीदवार |
दल |
मत% |
| शताब्दी रॉय |
तृणमूल |
36.10 |
| डॉ. इलाही महम्मद |
सीपीएम |
30.82 |