मेडक लोकसभा सीट तीन जिलों तक फैली है। इसकी मेडक व नरसापुर विधानसभा सीटें मेडक जिले में हैं, तो सिद्दीपेट जिले की सिद्दीपेट, गजवेल और दुब्बक। संगारेड्डी जिले की भी दो सीटें (संगारेड्डी व पटनचारू) भी इसी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं। करीब 15.36 हजार मतदाताओं वाली लोकसभा सीट में छोटे किसानों और खेतिहर मजदूरी करने वाले वर्गों की आबादी ही सर्वाधिक है। इनमें मुन्नूरकापू साढ़े तीन लाख हैं, तो मुदिराज तीन लाख। मुस्लिम और वेल्मा मतदाता भी दो-दो लाख हैं। मुदिराज और मुस्लिम मतदाताओं के भरोसे पर कांग्रेस ने संगारेड्डी जिले के गांव चिटकुल से सरपंच रहकर उभरे नीलम मधु को मैदान में उतारा है। नीलम ने बीआरएस के बैनर तले पंचायत चुनाव से राजनीति शुरू की थी। वह 2023 में पटनचेरू विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर पार्टी छोड़ दी। फिर, बसपा से चुनाव लड़े और 46 हजार से ज्यादा मत पाकर सबका ध्यान खींचा। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की रहनुमाई में वह कांग्रेस में आ गए। उनके मुकाबले केसीआर के निकट रहे पूर्व आईएएस अधिकारी पी. वेंकटरामी रेड्डी हैं। ढाई साल पहले सिद्दीपेट के डीएम रहते हुए उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दिलाकर बीआरएस ने पहले एमएलसी बनाया और फिर लोकसभा उम्मीदवार। उनका रास्ता साफ करने के लिए मेडक से दो बार के सांसद के. प्रभाकर रेड्डी को बीआरएस ने दुब्बका से विधायक बनवा लिया है।
भाजपा ने पूर्व विधायक रघुनंदन राव पर फिर दांव लगाया है। उन्हें अपनी जाति के दो लाख वेल्मा और मोदी नाम का सहारा है। रघुनंदन को 2019 में करीब दो लाख मत हासिल हुए थे। उनका दावा है कि इस बार दक्षिण में भी मोदी की गूंज है।
नौ बार जीती कांग्रेस, चार बार बीआरएस
मेडक पर सर्वाधिक नौ बार कांग्रेस का कब्जा रहा है। कांग्रेस के ही एम. बागा रेड्डी सर्वाधिक चार बार जीते। तेलंगाना राष्ट्र समिति (अब बीआरएस) का गठन होने के बाद 2004 से लगातार इसी की जीत हो रही है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट हैदराबाद, तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), तेलंगाना प्रजा समिति व भाजपा भी एक-एक बार जीती है।
लेडी अमिताभ विजयाशांति की भी कर्मभूमि
लेडी अमिताभ के नाम से मशहूर गुजरे जमाने की अभिनेत्री विजयाशांति की कर्मभूमि भी मेडक रही। भाजपा ने उन्हें 1999 के चुनाव में सोनिया गांधी के खिलाफ आंध्र की कडप्पा सीट से उतारा था, लेकिन ऐन मौके पर सोनिया वेल्लारी चली गईं। फिर, विजयाशांति ने भी चुनाव नहीं लड़ा। बाद में तल्ली तेलंगाना पार्टी बनाई, जिसका टीआरएस में विलय कर दिया। 2009 में बीआरएस के टिकट पर सांसद बनीं। 2014 में कांग्रेस में चली गईं। 2019 में भाजपा में गईं और फिर 2023 में कांग्रेस ज्वाइन कर ली।
भाजपा का प्रभाव बढ़ रहा, पर मुकाबला बीआरएस-कांग्रेस में
सामाजिक कार्यकर्ता फारुख हुसैन बताते हैं कि पार्टियां जातीय गुणा-गणित कुछ भी लगाएं, यहां वोट प्रत्याशी देखकर पड़ते हैं। यह सही है कि भाजपा का प्रभाव बढ़ रहा है, लेकिन मुकाबला बीआरएस-कांग्रेस के ही बीच है। ऐतिहासिक कैथोलिक चर्च परिसर में मिले स्थानीय व्यवसायी राजकुमार कहते हैं कि केसीआर के भांजे और वित्त और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रहे हरीश राव ही यहां के असली हीरो हैं। उन्होंने सिद्दीपेट को आईटी हब बनाया और हैदराबाद से बाहर बड़ी कंपनियां लाने में सफल रहे। इससे युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिला है। बस अड्डे पर मिले उम्मेद खां कहते हैं कि मेडक का भला किसी ने नहीं किया। हरीश राव ने सारा विकास अपने सिद्दीपेट में ही कराया है। यहां तो ढंग का स्कूूल भी नहीं खुला।
पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजे
2019
| उम्मीदवार |
दल |
मत% |
| के. प्रभाकर रेड्डी |
बीआरएस |
51.8 |
| अनिल कुमार |
कांग्रेस |
24.3 |
2014
| उम्मीदवार |
दल |
मत% |
| के. प्रभाकर रेड्डी |
बीआरएस |
55.2 |
| वी. सुनीता लक्ष्मा रेड्डी |
कांग्रेस |
20.3 |