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Election Flashback: जब वीपी सिंह से ग्रामीण बोले-हम तोहके न राजा मांडा के देब वोट; 1988 का है दिलचस्प किस्सा

Tue, 02 Apr 2024 04:28 AM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

किताब वीपी सिंह, चंद्रशेखर, सोनिया गांधी और मैं...में वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय ने 1988 के चुनाव प्रचार का एक किस्सा साझा किया है। इसमें उन्होंने विश्वनाथ प्रताप सिंह की लोकप्रियता के बारे में बताया है। 
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वीपी सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमिताभ बच्चन के इस्तीफे के बाद खाली हुई इलाहाबाद संसदीय सीट पर उपचुनाव का बिगुल बज चुका था। कांग्रेस से अलग होकर इस सीट पर राजा मांडा विश्वनाथ प्रताप सिंह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहे थे। कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के बेटे सुनील शास्त्री को मैदान में उतारा था। कांग्रेस जानती थी कि यह लड़ाई 1984 वाली नहीं है, जब अमिताभ ने एकतरफा जीत हासिल की थी।
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यही वजह थी कि उस वक्त यूपी के मुख्यमंत्री रहे वीरबहादुर सिंह की पूरी कैबिनेट ने इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में डेरा डाल रखा था। किताब वीपी सिंह, चंद्रशेखर, सोनिया गांधी और मैं...में वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय लिखते हैं, शायद 1988 के अप्रैल का तीसरा सप्ताह चल रहा था। वीपी सिंह 70 मोटरसाइकिलों के काफिले के साथ चुनाव प्रचार करने निकले थे। दोपहर के करीब दो बज रहे थे। अचानक वीपी सिंह एक पेड़ के नीचे रुक गए। सामने खेत में कुछ ग्रामीण गेहूं की फसल काट रहे थे और उनके गट्ठर भी बना रहे थे। इनमें महिलाएं भी थीं। वीपी सिंह ने उन्हें देखा और पगडंडी पकड़कर उनकी तरफ चल दिए। वीपी सिंह ने कहा, मैं विश्वनाथ हूं, चुनाव में खड़ा हूं। मुझे आपका वोट चाहिए। करीब छह-सात ग्रामीण रहे होंगे, सभी ने एक साथ बोला-हम तोहके वोट न देब। केंद्र में भारी-भरकम मंत्रालय संभाल चुके यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री वीपी सिंह के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। वह लौटने लगे, लेकिन फिर मुड़कर पूछा, अच्छा हमको वोट नहीं देंगे, वह तो ठीक, फिर किसे देंगे।

उनको लग रहा था कि वह सभी कांग्रेस का नाम लेंगे, लेकिन उन्होंने कहा, हम राजा मांडा के वोट देब। वीपी मुस्कुराए और कहा, आप उन्हीं को वोट कीजिए। नतीजे आए तो वीपी सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी सुनील शास्त्री को एक लाख से भी ज्यादा मतों से हरा दिया था।
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