इस पर देवीलाल ने कहा, वह परेशानी पैदा करती है। चंद्रशेखर ने कहा, चौधरी साहब अगर सुषमा को वापस नहीं लिया तो आप सीएम नहीं रह सकते। अध्यक्ष होने के नाते मुझे आपको पार्टी से निकालने का अधिकार है।
यह कहानी 1977 के आम चुनाव के बाद की है। मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बन चुके थे और चंद्रशेखर जनता पार्टी के अध्यक्ष थे। पूर्व विदेश मंत्री व भाजपा की दिग्गज नेता रहीं दिवंगत सुषमा स्वराज तब हरियाणा में चौधरी देवीलाल की कैबिनेट का हिस्सा थीं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर अपनी जीवनी जीवन जैसा जिया, में लिखते हैं, मुख्यमंत्री देवीलाल शुरुआत से ही सुषमा को कैबिनेट के योग्य नहीं मानते थे। उन्होंने पहले तो सुषमा को कैबिनेट में शामिल करने से ही इनकार कर दिया था।
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इसके बाद में चंद्रशेखर की सलाह पर कैबिनेट मंत्री बनाया। इसी बीच एक दिन खबर आई कि देवीलाल ने एक मंत्री को बर्खास्त कर दिया। चंद्रशेखर ने तुरंत देवीलाल को फोन किया और पूछा कि क्या आपने सुषमा को बर्खास्त कर दिया? इस पर देवीलाल ने कहा, वह परेशानी पैदा करती है। चंद्रशेखर ने कहा, चौधरी साहब अगर सुषमा को वापस नहीं लिया तो आप सीएम नहीं रह सकते। अध्यक्ष होने के नाते मुझे आपको पार्टी से निकालने का अधिकार है। देवीलाल चौधरी चरण सिंह से मिलने पहुंचे। उनकी सलाह पर सुषमा कैबिनेट में बनी रहीं।