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Dharwad Ground Zero : कद्दावर चेहरा बनाम बाहुबली का मोहरा; कांग्रेस का दांव नया लेकिन मुकाबले में रोमांच नहीं

नीरज तिवारी Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Fri, 03 May 2024 06:38 AM IST

सार

केंद्रीय कोयला एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी को लगातार पांचवीं जीत से रोकने के लिए कांग्रेस ने विनोद आसुती को उतारकर दांव तो नया खेला है, पर मुकाबले में कोई रोमांच नहीं भर पाई है। विनोद लगातार दो चुनाव हार चुके बाहुबली विनय कुलकर्णी के करीबी बताए जाते हैं। विनय हत्या के मामले में जिला बदर है। इलाके से नीरज तिवारी की रिपोर्ट...
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अमर उजाला ग्राउंड रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स


1952 से लगातार 10 आम चुनावों में कांग्रेस की जीत का सिलसिला वर्ष 1996 में विजय संकेश्वर ने तोड़ा था। उन्होंने भी लगातार तीन चुनाव जीते और इस क्षेत्र को भाजपा का गढ़ बना दिया। इस बार कांग्रेस ने कुरुबा समुदाय के विनोद आसुती को प्रत्याशी बनाकर बाजी पलटने की कोशिश की है। पार्टी को उम्मीद है कि कुरुबा, मुस्लिम, आदिवासी और दलितों के साथ कैडर वोटरों के सहारे वह नैया पार लगा लेगी। लेकिन, लिंगायतों के गढ़ में भाजपा को नुकसान पहुंचाना उसके लिए आसान नजर नहीं आ रहा। इधर, भाजपा की रणनीति है कि लिंगायत और ब्राह्मण समेत सभी वर्गों के कैडर वोटों के सहारे उत्तर धारवाड़ की चार जीतों को मिलाकर यहां से लगातार आठवीं फतह हासिल कर ली जाए।  कभी कपास की खेती के लिए मशहूर धारवाड़ में कई कताई मिलें बंद हुईं, तो लोगों ने श्रीअन्न के रूप में ज्वार, बाजरा, मक्का के साथ तिलहन में सोयाबीन और मूंगफली की खेती का रकबा बढ़ा दिया। पीएम मोदी ने इसकी तारीफ भी की है।


जेल से जीता चुनाव, अब हुआ जिला बदर

प्रह्लाद जोशी से वर्ष 2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव हारने वाला विनय कुलकर्णी भाजपा से जुड़े एक जिला पंचायत सदस्य की हत्या के मामले में पहले जेल में रहा और अब जमानत के बाद जिला बदर है। वह प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहा है। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में कुलकर्णी ने धारवाड़ विधानसभा सीट जेल में रहते हुए भी जीत ली। क्षेत्र के निचले तबके में उसकी छवि रॉबिनहुड की है। विनोद के सिर पर विनय का हाथ माना जाता है।


विधानसभा में बराबरी पर खड़े दोनों दल

धारवाड़ में आठ विधानसभा सीटें हैं। इनमें से शिगगांव सीट हावेरी जिले में आती है, जहां से पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई विधायक हैं। पिछले साल विस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने 4-4 सीट पर जीत हासिल की थी।

      

सेक्स स्कैंडल का चुनाव पर कितना असर

सेक्स स्कैंडल में फंसे हासन प्रत्याशी और सांसद प्रज्वल रेवन्ना ने जदएस के साथ सहयोगी दल भाजपा को भी परेशानी में डाल दिया है। हालांकि, भाजपाई चुनाव पर इसके असर से इन्कार कर रहे हैं। जदएस जिन तीन सीटों से लड़ रही है, उन पर दूसरे चरण में ही मतदान हो चुका है। सात मई को उत्तरी कर्नाटक में चुनाव हैं, जहां लिंगायत समुदाय निर्णायक भूमिका में है। कांग्रेसी इस मसले को नारी शक्ति से जोड़कर जनता के बीच पहुंच रहे हैं। हालांकि, जनता की राय सियासत से इतर है। उसे बस प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा से मतलब है। तमाम गारंटियां दे रही कांग्रेस राज्य के लिए बेहतर मानी जाती है, पर यही लोग देश की राजनीति में भगवा लहराते हुए देखना पसंद करते हैं। सेक्स स्कैंडल को अधिकतर लोग जदएस से जोड़ते हैं। साथ ही भाजपा को जदएस से अलग होने की सलाह भी देते हैं।


पिछले दो चुनावों का हाल

2019 में भाजपा उम्मीदवार प्रह्लाद जोशी यहां 56 प्रतिशत वोट पाकर विजयी हुए थे। वहीं, कांग्रेस के विनय कुलकर्णी को उनके मुकाबले 40 प्रतिशत मत मिले थे। ऐसे ही 2014 के चुनाव में  भाजपा उम्मीदवार प्रह्लाद जोशी को  52 प्रतिशत मत तो कांग्रेस के विनय कुलकर्णी को 42 प्रतिशत मत मिले थे। 

 

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