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Gandhi Nagar Assembly Seat: लवली आगे, दीपू पीछे; डब्बू का हाल बेहाल, जानें गांधी नगर सीट का रुझान

Sat, 08 Feb 2025 10:35 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

Gandhi Nagar Assembly Election Result 2025 LIVE: दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजे आने जारी हैं। इस सीट पर कांग्रेस से भाजपा में आए अरविंदर सिंह लवली उतरे हैं। वे आम आदमी पार्टी के नवीन चौधरी (दीपू) और कांग्रेस के कमल अरोड़ा से आगे हैं। 
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गांधी नगर विधानसभा सीट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर नतीजे आने में अब कुछ ही देर बाकी है। रुझानों में ही कई नेताओं ने जबरदस्त बढ़त बनाकर अपनी ताकत दिखा दी है। इनमें एक दिल्ली की गांधी नगर सीट है, जहां भाजपा की तरफ से स्टार चेहरों में से एक अरविंदर सिंह लवली उतरे हैं। उन्होंने आम आदमी पार्टी के नवीन चौधरी (दीपू) और कांग्रेस के कमल अरोड़ा को पीछे छोड़ते हुए रुझानों में बढ़त बरकरार रखी है।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में गांधी नगर में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई।

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी।

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला। 

1993: गांधीनगर में भाजपा को मिली जीत
दिल्ली को विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 1993 में विधानसभा के चुनाव हुए। इस समय यहां से भाजपा के दर्शन कुमार बहल कांग्रेस के प्यारे लाल घी वाले को 2917 वोट से हराया था। 

1998: कांग्रेस ने भाजपा से छीनी सीट
1998 के विधानसभा चुनाव में मुकाबला फिर से कांग्रेस और भाजपा के बीच में देखने को मिला। इन दो दलों के उम्मीदवारों के अलावा सभी की जमानत जब्त हो गई थी। नतीजों की बात करें तो इस बार कांग्रेस 1993 में मिली हार का बदला ले लिया। इस चुनाव में कांग्रेस के अरविंदर सिंह (लवली) ने भाजपा सविंदरजीत सिंह बाजवा को 6762 वोट से हरा दिया था। 

2003: कांग्रेस को फिर मिली जीत
2003 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस के मौजूदा विधायक ही इस सीट पर जीते। कांग्रेस के अरविंदर सिंह (लवली) ने भाजपा के तरजीत सिंह को 23985 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया था। 

2008: अरविंदर सिंह लवली ने लगाई जीत की हैट्रिक
2008 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला देखने को मिला। हालांकि, लगातार दूसरी बार जीत कांग्रेस को ही मिली। कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली तीसरी बार गांधी नगर सीट से जीत गए। इस बार भी इनकी जीत काफी अच्छी थी। कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली ने भाजपा के कमल कुमार जैन को 31925 वोट से हरा दिया था।  

2013: अरविंदर सिंह लवली को एक बार फिर मिली जीत 
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। गांधीनगर विधानसभा सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। यहां कांटे के मुकाबले में जीत कांग्रेस को ही मिली। 3 बार यहां से विधायक अरविंदर सिंह लवली ने भाजपा के रमेश चंद जैन को 16961 वोट से हरा दिया था। आप अनिल कुमार बाजपेयी 16546 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे। 

2015: आप के अनिल कुमार बाजपेयी जीते
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव कराने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की।

गांधीनगर सीट पर इस बार आप ने अपनी पिछली हार का बदला लेते हुए जीत दर्ज कर ली थी। कांग्रेस के अरविंदर लवली को यहां से चुनाव नहीं लड़ा था। आप के अनिल कुमार बाजपेयी ने भाजपा के जितेन्द्र 7482 वोट से हरा दिया था। कांग्रेस के सुरेन्द्र प्रकाश शर्मा 16228 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे लेकिन फिर भी उनकी जमानत जब्त हो गई थी। 
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2020: आप ने दूसरी बार जीत सीट
2020 के विधानसभा चुनाव में आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। गांधीनगर की बात करें तो इस सीट पर फिर से मौजूदा विधायक अनिल कुमार बाजपेयी ने ही जीत का परचम लहराया था। लेकिन खास बार ये रही कि इस बार उन्होनें भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। इसके साथ ही अनिल कुमार बाजपेयी सीट पर दूसरी बार विधायक बन गए। भाजपा के अनिल कुमार बाजपेयी ने आप के नवीन चौधरी को 6,079 वोट से हरा दिया था। भाजपा को 48824 और आप को 42745 वोट मिले थे। 
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