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कानों देखी: लालू-तेजस्वी की खामोशी से लेकर अखिलेश के प्रत्याशी बदलने तक, जानें देश की राजनीति में चल क्या रहा

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Politics - फोटो : Amar Ujala
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लोकसभा चुनाव चौराहे पर अपने अंदाज के लिए मशहूर लालू प्रसाद यादव चुप हैं। तेजस्वी भी खामोश हैं। बड़े दिन बाद लालू ने केवल छात्रसंघ के दिनों के साथी और भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी की कैंसर की बीमारी को लेकर अपना दु:ख और शुभेच्छा व्यक्त की। आखिर राज क्या है? बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी लालू पर हमलावर हो चुके हैं। भाजपा के नेता जमकर हमला बोल रहे हैं। उल्टे लालू प्रसाद की पार्टी कुछ ऐसी सीटों पर प्रत्याशी खड़ा कर दे रही है, जिससे कांग्रेस के नेता भी हैरान हैं? माजरा क्या है? कांग्रेस के नेता से पूछिए तो कहते हैं कि लालू और तेजस्वी डरते नहीं, लेकिन ऑपरेशन लोटस की आशंका से इनकार नहीं करते। आम आदमी पार्टी के नेताओं की जेल की तरफ लगी लाइन विपक्ष के नेताओं को डराने के लिए काफी है। एनसीपी (शरद पवार) के नेता कहते हैं कि वह इस पर बोलना नहीं चाहते।

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दिल्ली में कौन राज करेगा?
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना दिल्ली की सरकार के जेल से चलने के पक्ष में नहीं हैं। गृह मंत्रालय के सूत्र भी यहां नैतिकता का सवाल खड़ा कर देते हैं। समझा जा रहा है कि केंद्र और उपराज्यपाल दोनों के सचिवालय इसकी तमाम संभावनाएं तलाश रहे हैं। खबर यह भी है कि आम आदमी पार्टी इस बारीकी को ध्यान में रखकर रणनीति बना रही है। वहीं भाजपा नफा और नुकसान को ध्यान में रखकर निर्णय लेने के पक्ष में हैं। आम आदमी पार्टी का एक बड़ा खेमा, जिसमें आतिशी, सौरभ भारद्वाज, जेल से छूटकर आए संजय सिंह समेत अन्य हैं। यह खेमा आक्रामक तरीके से विक्टिम कार्ड खेलना चाहता है। इस दौरान अरविंद केजरीवाल की पत्नी धीरे-धीरे फ्रंट फुट पर आ रही हैं, जबकि भाजपा के नेता चुगली कर रहे हैं कि जल्द ही कुछ बड़ा होने वाला है। यह बड़ा दिल्ली में लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के कुछ समय पहले होगा। ध्यान रहे दिल्ली में छठवें चरण, 25 मई को मतदान होना है। यही तय करेगा कि दिल्ली में कौन राज करेगा?

रायबरेली तो ठीक है, अमेठी का क्या होगा?
कांग्रेस के नेता राय बरेली से महासचिव प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने की सूचना दे रहे हैं, लेकिन अमेठी पर मौन हैं? यह पूछने पर कि क्या अमेठी को पार्टी स्मृति ईरानी के लिए छोड़ देगी? बताते हैं, कदापि नहीं। मुकाबला तगड़ा होगा। स्मृति हारेंगी? यह पूछने पर कैसे? कहते हैं कि वायनाड़ में मतदान हो जाने दीजिए। तैयारी चल रही है। गांधी परिवार के करीबी केएल शर्मा इस बारे में कहते हैं कि घोषणा होने दीजिए। सब पता चल जाएगा। 
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शर्मा कहते हैं कि रायबरेली और अमेठी दोनों ही संसदीय सीट पर जनता नेहरू-गांधी को परिवार को ही देखना चाहती है। शर्मा कहते हैं कि पार्टी की दोनों संसदीय सीट पर रूटीन तैयारी चल रही है। जैसे प्रत्याशी की घोषणा होगी, हमारे कार्यकर्ता पार्टी को जिताएंगे। कांग्रेस सांसद के परिवार के एक और पुराने वफादार का कहना है कि इस बार अमेठी में स्मृति को हराएंगे। बस देखते जाइए।

अखिलेश इतना प्रत्याशी क्यों बदल रहे हैं?
समाजवादी पार्टी में सब ठीक चल रहा है? बड़ा सवाल है? क्या पार्टी किसी बड़े दबाव के दौर से गुजर रही है? सपा के एक बड़े नेते ने कुछ कहना चाहा, लेकिन फिर चुप हो गए। बस इतना ही बोले कि आप मीडया वाले न? दरअसल, रामपुर, मेरठ समेत तमाम सीटों पर सपा को प्रत्याशी तय करने में पसीना आ रहा है। बदायूं में भी कयास का दौर है। आजमगढ़ को लेकर अभी आगा पीछा चल रहा है। पता चला है कि समाजवादी पार्टी में कुछ बड़े नेता ऐसे हैं जो लोकसभा चुनाव लड़ने का मन नहीं बना पा रहे हैं। खबर तो यह भी चाचाओं और भतीजों में भी संवाद की लाइन पूरी तरह स्मूथ नहीं हो पा रही है। फिर अखिलेश यादव के दोस्त सपा नेता का दावा है कि लोकसभा की 80 में कम से कम 25 जीतेंगे।

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