मोबाइल एप और सामान्य सर्वे पर भी रोक (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : एएनआई
आयोग ने यह स्वीकार किया कि चुनाव प्रचार के दौरान सामान्य चुनावी वादे स्वीकार्यता के दायरे में हैं। हालांकि, निष्पक्ष चुनाव कराने के संकल्प के साथ चुनाव आयोग ने इस बात को भी रेखांकित किया कि राजनीतिक दलों की तरफ से सर्वेक्षण जैसी गतिविधियां प्रामाणिक सर्वेक्षणों और राजनीतिक लाभ के लिए मतदाताओं के पंजीकरण जैसी गतिविधियां पक्षपाती और जनहित में किए जाने वाले प्रयासों के बीच अंतर को स्पष्ट नहीं करतीं। आयोग के मुताबिक चुनाव प्रचार के दौरान सर्वे जैसी गतिविधियां वैध सर्वेक्षण गतिविधियों या सूचना देने के प्रयासों के रूप में ही दिखाई जाती हैं, लेकिन इनमें संभावित व्यक्तिगत लाभ से संबंधित सरकारी कार्यक्रमों या पार्टी के एजेंडा को अलग नहीं किया जा सकता।
केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों के चुनाव अधिकारियों को ऐसे विज्ञापनों से सख्ती से निपटने को कहा है जिनमें मतदाताओं को प्रभावित करने की क्षमता हो। जिला निर्वाचन कार्यालय को कानून के तहत ऐसे सर्वे, मोबाइल एप और विज्ञापनों से सख्ती से निपटने को कहा गया है जिनके कारण चुनाव प्रभावित होने की आशंका हो।