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वजह: आखिर क्यों रूस अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को छोड़ना चाहता है? जानिए यहां

Tue, 27 Apr 2021 04:10 PM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

रूस ने आईएसएस छोड़ने का निर्णय तब लिया है, जब उसके और अमेरिका के बीच के संबंध कई मोर्चों पर लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं। जब अमेरिका ने क्रेमलिन को "सोलर विंड" हैक करने और 2020 के चुनाव में हस्तक्षेप करने के लिए दोषी ठहराया है। 
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अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पिछले दो दशकों तक अंतरिक्ष अनुसंधान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग देने के बाद, अब रूस ने 2025 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से अपना नाम वापस लेने की घोषणा कर दी है। साथ ही राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद की फ्लोटिंग प्रयोगशाला का निर्माण और प्रबंधन कर 2030 तक ऑरबिट में लॉन्च करने का भी एलान कर दिया है। 

वहीं रोस्कोसमोस अंतरिक्ष एजेंसी के प्रमुख दिमित्री रोगोजिन ने एक मीडिया को दिए साक्षात्कार में कहा है कि यदि हमारी योजनाओं के अनुसार, हम 2030 में फ्लोटिंग प्रयोगशाला को कक्षा में डालने में सफल होते हैं, तो यह हमारे लिए एक बड़ी कामयाबी होगी। क्योंकि हमारा मकसद दुनिया में मानवयुक्त अंतरिक्ष अन्वेषण में एक नया कदम रखना है। गौरतलब है कि रूस ने आईएसएस छोड़ने का निर्णय तब लिया है, जब उसके और अमेरिका के बीच के संबंध कई मोर्चों पर लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं।

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अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन क्या करता है?

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, एक बड़ा अंतरिक्ष यान है जो विस्तारित अवधि के लिए पृथ्वी की निचली कक्षा में रहता है। यह अंतरिक्ष में एक बड़ी प्रयोगशाला की तरह है। इसमें अंतरिक्ष यात्री हफ्तों या महीनों तक रहते हैं और माइक्रोग्रैविटी में रहकर विभिन्न प्रकार के प्रयोग करते हैं।
 

पूर्व सोवियत संघ का मीर अंतरिक्ष स्टेशन, जो बाद में रूस द्वारा संचालित किया गया था, वह 1986 से 2001 तक ही कार्यात्मक था। वहीं आईएसएस 1998 से अभी तक अंतरिक्ष में कार्यात्मक है। आईएसएस, पांच अंतरिक्ष एजेंसी: नासा (संयुक्त राज्य अमेरिका), रोस्कोसमोस (रूस), जेएएक्सए (जापान), ईएसए (यूरोप) और सीएसए (कनाडा) के बीच अनुकरणीय सहयोग के लिए भी जाना जाता है।


नासा के अनुसार, 19 देशों के 243 लोग अब तक आईएसएस का दौरा कर चुके हैं, और फ्लोटिंग प्रयोगशाला में 108 देशों और क्षेत्रों के शोधकर्ताओं से 3,000 से अधिक अनुसंधान और शैक्षिक जांच की है।

अमेरिका-रूस के बीच बढ़ता तनाव 

रिपोर्ट के अनुसार आईएसएस को सफल बनाने में रूस का बड़ा योगदान रहा है। 2011 में अमेरिका द्वारा अपने अंतरिक्ष शटल प्रोग्राम को सेवानिवृत्त करने के बाद से ही सोयुज यात्री वाहन अंतरिक्ष यात्रियों को आईएसएस तक ले जाने का काम कर रहा था। 
 

हालांकि पिछले साल अंतरिक्ष यात्रियों को आईएसएस तक ले जाने के लिए एलन मस्क द्वारा विकसित स्पेसएक्स प्रणाली का उपयोग किया जाने लगा। जिसकी वजह से रोस्कोसमोस को बड़ा झटका लगा। क्योंकि रूस अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष स्टेशन तक ले जाने के लिए नासा से माेटी रकम लेता था। रिपोर्ट के अनुसार 2011 से 2019 के बीच नासा ने सोयूज उड़ानों पर 3.9 बिलियन डॉलर खर्च किए थे। अगले साल, यूएस के पास स्पेसएक्स के अलावा एक और घरेलू विकल्प होने की उम्मीद है। 


यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम और रूस के बीच संबंध खराब से बदतर होते जा रहे हैं। अमेरिका ने क्रेमलिन को "सोलर विंड" हैक करने और 2020 के चुनाव में हस्तक्षेप करने के लिए दोषी ठहराया है। वहीं पिछले हफ्ते चेक रिपब्लिक पर हथियार डिपो में 2014 विस्फोट में शामिल होने का आरोप लगने के बाद रूस को नाटो गठबंधन से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था।

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क्या होगा रूस का अगला कदम?

रूस अब अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण और प्रबंधन करने की योजना बना रहा है, जिसे वह 2030 तक कक्षा में लॉन्च करना चाहता है। इंटरफैक्स की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के अंतरिक्ष मॉड्यूल को एनर्जिया कॉर्पोरेशन द्वारा असेंबल किया जा रहा है, और इसकी न्यूनतम लागत 5 बिलियन डॉलर है।
 

स्टेशन कथित तौर पर पृथ्वी की एक उच्च ऑर्बिट पर परिक्रमा करेगा, जिससे ध्रुवीय क्षेत्रों (पोलर रीजन) का बेहतर निरीक्षण किया जा सकेगा, खासकर तब जब रूस आर्कटिक समुद्री मार्ग तैयार करने की योजना बना रहा है।

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