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क्या है रॉलेट एक्ट? उर्मिला मातोंडकर ने CAA से की इसकी तुलना

Fri, 31 Jan 2020 01:22 PM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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Urmila Matondkar - फोटो : social media
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में धीरे-धीरे बॉलीवुड के चेहरे भी सामने आ रहे हैं। पहले स्वरा भास्कर का सीएए विरोध पर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। अब अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर भी इसके विरोध में आ गई हैं। बता दें, गुरुवार को सीएए, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC - National Register for Citizens) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR - National Population Register) के खिलाफ नॉन वॉयलेंट पीपुल्स मूवमेंट ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के मौके पर एक बैठक आयोजित की थी। इस सार्वजनिक बैठक के दौरान बॉलीवुड अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) की तुलना 1919 के रॉलेट एक्ट से की।

आखिर क्या है रॉलेट एक्ट? इस कानून से सरकार को कौन से अधिकार प्राप्त हुए? क्यों की गई नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) से इसकी तुलना? इन सभी सवालों के जवाब आपको आगे की स्लाइड में मिल जाएंगे। पढ़ते हैं आगे... 
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CAA PROTEST - फोटो : पीटीआई

क्या था रॉलेट एक्ट? 

  • रोलेट एक्ट को काला कानून भी कहा जाता है। 
  • देश में उभर रहे राष्ट्रीय आंदोलन को खत्म करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने यह कानून (The Anarchical and Revolutionary Crime Act, 1919) बनाया गया था। 
  • ये कानून सर सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता वाली सेडिशन समिति की सिफारिशों के आधार पर बनाया गया था। 

इस कानून के तहत प्राप्त होने वाले अधिकार-

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NRC & CAA PROTEST - फोटो : प्रयागराज
  • इस कानून से ब्रिटिश सरकार को ये अधिकार प्राप्त हो गया था कि वह किसी भी भारतीय पर अदालत में बिना मुकदमा चलाए उसे जेल में बंद कर सकती थी।
  • इस कानून के तहत अपराधी को उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले का नाम जानने का भी अधिकार नहीं था। इस कानून का पूरे देश में जमकर विरोध हुआ था।
  • इसे विरोध में कई देशव्यापी हड़ताल, जुलूस और प्रदर्शन होने लगे। महात्मा गांधी ने भी बड़े पैमाने पर हड़ताल का आह्वान किया था। 

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NRC & CAA PROTEST - फोटो : प्रयागराज

क्या है नागरिकता कानून 2019?

  • नागरिकता अधिनियम 1955 में नागरिकता संशोधन कानून 2019 के तहत कुछ अनुबंध जोड़ दिए गए हैं।
  • इसके तहत 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत आए बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के उन छह अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख) को, जिन्हें अपने देश में धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है, उन्हें गैरकानूनी नहीं माना जाएगा। बल्कि भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया जाएगा।
  • संशोधन से पहले इस कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल भारत में रहना अनिवार्य था।
  • संशोधित कानून में जिन तीन पड़ोसी देशों के छह अल्पसंख्यकों की बात की गई है, उनके लिए यह समयावधि 11 से घटाकर 6 साल कर दी गई है।
  • साथ ही नागरिकता अधिनियम, 1955 में ऐसे संशोधन भी किए गए हैं कि इन लोगों को नागरिकता देने के लिए उनकी कानूनी मदद की जा सके।

क्या कहा उर्मिला मातोंडकर ने...

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Urmila Matondkar - फोटो : ANI
लोगों को संबोधित करते हुए मातोंडकर ने कहा, '1919 का रॉलेट एक्ट और 2019 का सीएए ऐसे दो अधिनियम हैं जिन्हें इतिहास में 'काले कानून' के रूप में जाना जाएगा। सीएए गरीब लोगों के खिलाफ है। हम ऐसा अधिनियम नहीं चाहते हैं जो धर्म के आधार पर मेरी पहचान और नागरिकता का पता लगाता हो। यह हमारे संविधान में है कि आप धर्म, भाषा, लिंग या क्षेत्र के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकते।'

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