उप राष्ट्रपति नायडू मैसूर में आयोजित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेजेज के स्वर्ण जयंती समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि समय आ चुका है जब हम देश में भाषा की शिक्षा के बारे में सोचें और इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाएं।
वैश्विक स्तर के अध्ययनों की बात करते हुए नायडू ने कहा कि शिक्षा के शुरुआती दिनों में बच्चों को मातृ भाषा सिखाने से उनका मानसिक विकास तेज और बेहतर होता है। इससे बच्चों की रचनात्मक और तार्किक क्षमता भी बढ़ती है। बच्चों को एक से ज्यादा भाषा जरूर सीखनी चाहिए।
यहां नायडू ने प्रस्तावित राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए इस पर खुशी भी जाहिर की। कहा कि इस नई नीति में ऐसे कई प्रस्ताव हैं जो मातृ भाषा के साथ-साथ ट्राइबल और साइन लैंग्वेज की शिक्षा को बढा़वा देते हैं। इसमें कहा गया है कि बच्चों में कई भाषाएं सीखने की क्षमता होती है। जरूरत है कि हम देश की शिक्षा व्यवस्था में इसे प्रोत्साहित करें।
नायडू ने यह भी कहा कि लोग गर्व और सम्मान के साथ अपनी मातृ भाषा बोलें और लिखें।