नए एनएमसी विधेयक में किए गए संशोधनों के अनुसार, मेडिकल के पीजी प्रोग्राम्स में दाखिले के लिए नेशनल एग्जिट टेस्ट के परिणाम को आधार बनाया जाएगा, जिसे देशभर में एक समान परीक्षा के रूप में आयोजित किया जाएगा। इससे अभ्यर्थियों को एमबीबीएस की अंतिम परीक्षा पास करने का बाद पीजी कोर्सेज में दाखिले के लिए अलग-अलग परीक्षाओं में शामिल नहीं होना पड़ेगा। अभ्यर्थियों को एमबीबीएस के बाद प्रैक्टिस के लाइसेंस के लिए भी अलग परीक्षा में शामिल नहीं होना होगा।
हालांकि ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) से पीजी करने के लिए अभ्यर्थियों को उसकी अलग परीक्षा देनी होगी। साथ ही डीएम व एमसीएच (DM / MCh) कोर्सेज में दाखिले के लिए होने वाली राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा नीट सुपर स्पेशियलिटी भी जारी रहेगी।
बता दें कि एनएमसी विधेयक दिसंबर 2017 में लोकसभा में पेश किया गया था। लेकिन 16वीं लोकसभा का कार्यकाल खत्म होने से यह विधेयक भी खत्म हो गया।
हर साल करीब 80 हजार विद्यार्थी देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्सेज में दाखिला लेते हैं। जबकि देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल पीजी की 50 हजार सीटों के लिए करीब 1.5 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होते हैं।