प्रधान ने कहा कि राज्य सरकार को अपनी भूमिका पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में रैगिंग जैसी घटनाएं दोबारा न हों। उन्होंने कहा कि "अन्य राज्यों में, राज्यपाल राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति करते हैं। पश्चिम बंगाल में राज्यपाल कुलपतियों की नियुक्ति के अपने अधिकार में हैं।
राज्यपाल पर हमला करने के बजाय, राज्य सरकार को परिसरों को सुरक्षित बनाने और ऐसी घटनाओं को सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जादवपुर विश्वविद्यालय में किसी छात्र की मौत की घटना दोहराई नहीं जा सकती है।
प्रधान की यह टिप्पणी आठ राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यवाहक कुलपतियों की नियुक्ति और आठ अन्य के नाम सामने आने के फैसले को लेकर राज्य सरकार और राजभवन के बीच टकराव के मद्देनजर आई है। इससे पहले, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बोस पर तीखा हमला करते हुए उन पर मानदंडों का उल्लंघन करने और विश्वविद्यालयों पर आर्थिक नाकेबंदी लगाने की धमकी देने का आरोप लगाया था।
सीएम ममता बनर्जी के अलावा, राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के करीबी पूर्व कुलपतियों ने बोस पर नियमों का उल्लंघन करने और नियुक्तियों को आगे बढ़ाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग को दरकिनार करते हुए एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।
पूर्व कुलपतियों ने राज्यपाल बोस को भेजी कानूनी नोटिस
वहीं, पश्चिम बंगाल के सरकारी विश्वविद्यालयों के पूर्व कुलपतियों ने राजभवन को कानूनी नोटिस भेजा है। इसमें उन्होंने राज्यपाल सीवी आनंद बोस से कथित तौर पर उनके एक वर्ग को बदनाम करने के लिए 15 दिनों के भीतर माफी मांगने को कहा है।
दरअसल, राज्यपाल बोस ने पिछले सप्ताह एक वीडियो में कहा था कि पहले के कुछ कुलपतियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, यौन उत्पीड़न और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप थे।यहीकारण है कि उनका कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया। उनके इसी बयान को लेकर तृणमूल कांग्रेस समर्थक पूर्व कुलपतियों और शिक्षाविदों के एक संगठन ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन एजुकेशनिस्ट्स फोरम ने कानूनी नोटिस में कहा कि अगर उन्होंने पूर्व कुलपतियों से माफी नहीं मांगी तो राज्यपाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा। इतना ही नहीं प्रत्येक के लिए 50 लाख रुपये का जुर्माना भी मांगा जाएगा।