संघ लोक सेवा आयोग (UPSC - Union Public Service Commission) को प्रश्नपत्रों के के संक्षेप हिन्दी अनुवाद में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ये दिक्कतें खास तौर पर इंजीनियरिंग, मेडिकल साइंसेज जैसे तकनीकि विषयों के प्रश्नपत्रों में आती है। केंद्र सरकार ने बुधवार को एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए लोकसभा में यह जानकारी दी।
यह भी बताया गया कि आयोग ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति भी बनाई थी जिसने 18 जनवरी 1698 को आधिकारिक भाषाओं के संबंध में संसद द्वारा स्वीकृत प्रस्तावों को लागू करने के तौर-तरीकों की समीक्षा की थी।
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समिति ने 2012 में अपनी रिपोर्ट यूपीएससी को सौंपी थी। इसमें तकनीकी भाषाओं के प्रश्नपत्रों के हिन्दी अनुवाद में कुछ व्यवहारिक परेशानियों का जिक्र किया गया था। इसके अलावा आज के समय की उच्च शिक्षा व्यवस्था में हिन्दी व अन्य भाषाओं के विकास की भी चर्चा थी। ये जानकारी केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी।
सरकार से पूछा गया था कि क्या भारतीय वन सेवा परीक्षा, इकोनॉमिक सर्विस, स्टैटिस्टिकल सर्विस, जियोलॉजिकल और इंजीनियरिंग सर्विस परीक्षाएं हिन्दी भाषा में आयोजित नहीं की जा सकतीं? अगर ऐसा इन परीक्षाओं के तकनीकि दायरों के कारण है, तो क्या सरकार ने कभी ऐसी तकनीकि शिक्षा से संबंधित परीक्षाओं केल लिए हिन्दी में परीक्षा कराने की कोशिश की?
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बता दें कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ये सभी परीक्षाएं भारत सरकार के संबंधित विभागों व मंत्रालयों द्वारा तैयार नियमों व दिशानिर्देशों के आधार पर आयोजित कराता है।