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UPSC Extra Attempts: केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में जवाब, यूपीएससी सीएसई में अतिरिक्त मौका देने संबंधी फैसला कार्मिक मंत्रालय करेगा

Mon, 21 Mar 2022 07:50 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

UPSC Extra Attempt Case: कोरोना संक्रमण के कारण यूपीएससी की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2021 को देने से चूके तीन उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में अतिरिक्त मौका देने के लिए मांग याचिका दायर की थी।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani
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विस्तार
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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए अतिरिक्त अवसर देने की मांग संबंधी याचिका पर सोमवार 21 मार्च को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब पेश किया। केंद्र सरकार ने कहा कि उम्मीदवारों को अतिरिक्त मौका देने संबंधी फैसला, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को लेना है।  

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कोरोना संक्रमण के कारण यूपीएससी की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2021 को देने से चूके तीन उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में अतिरिक्त मौका देने के लिए मांग याचिका दायर की थी। याचिका पर जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस एएस ओका की पीठ सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ता तीन उम्मीदवारों ने यूपीएससी 2021 की प्रारंभिक परीक्षा को क्वालीफाई किया था, लेकिन कोविड-19 महामारी से संक्रमित होने के बाद वे मुख्य परीक्षा के सभी पेपर नहीं दे सके। इसलिए, वे परीक्षाओं में उपस्थित होने के लिए एक अतिरिक्त प्रयास की मांग कर रहे हैं। 
 

सोमवार को सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने पीठ के सामने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि यूपीएससी के अधिवक्ता इस मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करेंगे। भाटी ने कहा, वास्तव में इसकी जरूरत नहीं है। परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया गया है, अब केवल एक ही मुद्दा बचा है, वह है अतिरिक्त प्रयास देने का। वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि अदालत ने पिछली बार यूपीएससी को मौका दिया था लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। 

 
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इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूपीएससी को यह जवाब देना है कि उम्मीदवारों को एक अवसर देना संभव है या नहीं? एएसजी ने कहा कि यह ऐसा फैसला है जिसे वास्तव में डीओपीटी को ही लेना होगा और इसके लिए समय की जरूरत है। इस पर पीठ ने कहा कि वह इस मामले में आगे की सुनवाई 25 मार्च को करेगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि पिछली बार भी कहा गया था कि यह एक जटिल मुद्दा है और निर्देश लेने की जरूरत है और इसलिए पीठ ने समय दिया था।  
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