समिति ने अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और अन्य हितधारकों से परामर्श के बाद यूपी कॉलेज परीक्षा 2021 पर रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट के अनुसार, प्रथम वर्ष के अंक द्वितीय वर्ष की परीक्षा के अंकों के आधार पर निर्धारित किए जाने चाहिए। ऐसा इसलिए किया जाएगा कि छात्र यूपी कॉलेज परीक्षा 2021 का एक साल ही लेकर ग्रेजुएशन पास न कर लें। क्योंकि, अधिकांश जगह 2020 और 2021 की परीक्षाएं नहीं हुई हैं। ऐसे में छात्र एक ही साल की परीक्षा देकर पास कर सकते थे।
परीक्षा का प्रारूप तय करने की अनुमति संभव
समिति ने अपने सुझाव में यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने स्तर पर अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए यूपी कॉलेज परीक्षा 2021 का प्रारूप तय करने की अनुमति दी जानी चाहिए। प्रथम वर्ष के छात्रों के अंक द्वितीय वर्ष की परीक्षा के अंकों के आधार पर निर्धारित किए जाएंगे। हालांकि, कॉलेज परीक्षा 2021 के बारे में अधिक विवरण के लिए छात्रों को अपने संबंधित कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।