उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में भी अब विद्यार्थियों को पूरक परीक्षा देने का अवसर दिया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इसका मसौदा तैयार किया है। विभाग की आगामी बैठक में इसे लागू करने पर निर्णय किया जाएगा।
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सरकार का मानना है कि इंटरमीडिएट में पूरक परीक्षा का अवसर नहीं होने के कारण किसी विषय में दो-चार नंबर कम होने से फेल होने वाले विद्यार्थी एक वर्ष पिछड़ जाते हैं। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि बोर्ड परीक्षा-2020 से इंटरमीडिएट में भी पूरक परीक्षा का अवसर देने की व्यवस्था करने का प्रस्ताव है। अंकतालिका में कहीं भी पूरक परीक्षा से उत्तीर्ण होने का जिक्र नहीं किया जाएगा ताकि विद्यार्थी हीनभावना के शिकार न हों।
अभी यूपी बोर्ड की हाई स्कूल परीक्षा में छह में से एक विषय में फेल होने पर भी विद्यार्थी को उत्तीर्ण माना जाता है। विद्यार्थी जिस विषय में फेल हुए हैं, उस विषय में सुधार के लिए पूरक परीक्षा दे सकते हैं। दो विषय में फेल होने पर किसी एक विषय में पूरक परीक्षा देकर अगली कक्षा में प्रवेश ले सकते हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने हाई स्कूल और इंटरमीडिएट में एक से अधिक विषयों में पूरक परीक्षा की व्यवस्था लागू करने का मसौदा तैयार किया है।
इसलिए भी पड़ी जरूरत
प्रदेश के 2248 राजकीय विद्यालयों और 4512 सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों के आधे से अधिक पद खाली हैं। शिक्षकों की कमी के कारण स्कूलों में विभिन्न विषयों का पाठ्यक्रम पूरा नहीं हुआ है। बच्चों को इसका खामियाजा नहीं भुगतना पड़े, इसलिए इंटरमीडिएट में पूरक परीक्षा की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव लाया गया है।
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