फारसी और विदेशी भाषा की 60, विज्ञान की 63 और सामाजिक विज्ञान की 74 फीसदी किताबों में महिलाओं की कोई तस्वीर नहीं है। रिपोर्ट में महाराष्ट्र के पाठ्यपुस्तक उत्पादन एवं पाठ्यक्रम अनुसंधान ब्यूरो द्वारा 2019 में लैंगिक रूढ़िवादों को हटाने के लिए कई पाठ्यपुस्तक छवियों में सुधार का भी संज्ञान लिया गया।
इसमें दूसरी कक्षा की पाठ्यपुस्तकों में महिला और पुरुष दोनों घर के काम करते दिख रहे हैं, वहीं एक महिला डॉक्टर और पुरुष शेफ की भी तस्वीर थी। विद्यार्थियों से इन तस्वीरों पर गौर करने और इन पर बात करने के लिए कहा गया था।
ग्लोबल एजुकेशन मॉनीटरिंग रिपोर्ट (जीईएम रिपोर्ट) एक स्वतंत्र टीम बनाती है और यूनेस्को इसे प्रकाशित करता है। इसे शिक्षा पर सतत विकास लक्ष्य पूरा करने में हुई प्रगति की निगरानी का आधिकारिक आदेश प्राप्त है। इस रिपोर्ट में इटली, स्पेन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया, कोरिया, अमेरिका, चिली, मोरक्को, तुर्की और युगांडा में भी पाठ्यपुस्तकों में महिलाओं के साथ जुड़ी इन रूढ़ियों का उल्लेख है।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि कोरोना महामारी का सबसे बुरा प्रभाव शिक्षा जगत पर पड़ेगा। बच्चों की सीखने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होगी और इसका दूरगामी नुकसान होगा। यूनेस्को ने सरकारों से इस मामले में विशेष ध्यान देने और शिक्षा प्रणालियों के पुनर्निर्माण के लिए समावेशी चुनौतियों पर कड़ी नजर रखने पर जोर दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक स्कूलों कब तक बंद रहेंगे इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा एक विकल्प जरूर है लेकिन एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसे बच्चों का है जिनके पास संसाधन नहीं हैं। उनके लिए यह बेहद मुश्किल व्यवस्था है और इससे सामाजिक आर्थिक गैप बढ़ने का संकट है।
रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल बंद होने से दुनियाभर में 154 करोड़ बच्चे प्रभावित हुए। इनमें भी लड़कियों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है। उनकी पढ़ाई बंद होने का खतरा बढ़ेगा और शिक्षा में लैंगिक अंतर भी बढ़ेगा।