कुछ डिग्रियों पर लागू नहीं होगा यह नियम
यह नया नियम 4 अप्रैल को अधिसूचित किया गया। इसके अनुसार, अब विदेशी स्कूलों और कॉलेजों की डिग्रियों की जांच के लिए एक पारदर्शी और तकनीक आधारित प्रणाली बनाई गई है। हालांकि, चिकित्सा, फार्मेसी, नर्सिंग, कानून, वास्तुकला और कुछ अन्य पेशेवर कोर्स की डिग्रियों की मान्यता पर यह नियम लागू नहीं होगा। इनकी जांच पहले की तरह ही उनके क्षेत्र के नियामक निकायों द्वारा तय मानकों के अनुसार होगी।
भारत को शिक्षा का वैश्विक केंद्र बनाना लक्ष्य
यूजीसी के अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने कहा कि यह बदलाव लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी समस्या को हल करता है और यह नई शिक्षा नीति 2020 के उस लक्ष्य के अनुरूप है, जिसमें भारत को शिक्षा का वैश्विक केंद्र बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारतीय कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को विदेशी छात्रों को आकर्षित करना है, तो उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि विदेशी डिग्रियों को निष्पक्ष और समय पर मान्यता मिले।
अब समकक्षता (equivalence) तय करने की प्रक्रिया में कुछ तय मापदंड होंगे, जैसे उस विदेशी संस्थान की मान्यता, डिग्री की अवधि और स्तर तथा उसकी भारत की डिग्रियों से कैसे तुलना की जा सकती है।
नई समिति का किया जाएगा गठन
इस नए नियम में यूजीसी ने एक स्थायी समिति बनाने की व्यवस्था की है, जो इन विदेशी संस्थानों और उनकी डिग्रियों की वैधता की जांच करेगी और तय करेगी कि वे भारतीय मानकों के बराबर हैं या नहीं। इससे पहले की तरह मनमर्जी से फैसले नहीं होंगे।
छात्र ऑनलाइन ट्रैक कर सकेंगे आवेदन की स्थिति
इसके अलावा, यूजीसी एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू करेगा, जहां छात्र अपनी विदेशी डिग्री को मान्यता दिलाने के लिए आवेदन कर सकेंगे और अपनी आवेदन की स्थिति को ट्रैक भी कर सकेंगे।
इन तथ्यों की जांच करेगी समिति
यह स्थायी समिति समय-समय पर बैठक करेगी और तय मापदंडों जैसे उस विदेशी संस्थान की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग आदि को देखते हुए निर्णय देगी।
समिति डिग्री की न्यूनतम अवधि, उसमें लगने वाले क्रेडिट और उसके ढांचे की जांच करेगी। इसमें मुख्य विषय, वैकल्पिक विषय, अलग-अलग विषयों का मिश्रण, प्रयोगशाला कार्य, पढ़ाई के घंटे, स्वयं अध्ययन और अनुभवात्मक शिक्षा शामिल होंगे। साथ ही, थीसिस, प्रोजेक्ट या इंटर्नशिप जैसी मूल्यांकन प्रक्रियाओं को भी देखा जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विदेशी और भारतीय पाठ्यक्रम के बीच स्तर में समानता है।
यूजीसी ने यह भी बताया है कि किन शर्तों पर विदेशी डिग्रियों को मान्यता दी जाएगी:
- विदेशी संस्थान अपने देश में मान्यता प्राप्त होना चाहिए।
- छात्र ने उस डिग्री के लिए पूरा कोर्स किया हो।
- और उस कोर्स में दाखिले की शर्तें भारत में समान कोर्स की शर्तों जैसी होनी चाहिए।
यूजीसी ने यह साफ किया है कि जो डिग्रियां किसी गैर-मान्यता प्राप्त संस्थान या कोर्स से ली गई हैं, या जो भारत के नियमों के खिलाफ दी गई हैं (जैसे फ्रेंचाइज़ी मॉडल के जरिए भारत में संचालित कोर्स), उन्हें मान्यता नहीं मिलेगी।
यूजीसी ने समकक्षता प्रमाण-पत्र के लिए एक ऑनलाइन प्रक्रिया भी बनाई है। छात्रों को एक तय शुल्क और जरूरत होने पर दस्तावेजों का प्रमाणित अंग्रेजी अनुवाद जमा कराना होगा।
अंतिम फैसला यूजीसी के अधीन, 15 दिनों में मिलेगा जवाब
हर आवेदन की जांच यूजीसी की स्थायी समिति करेगी और 10 कार्यदिवस में अपनी सिफारिश देगी। इसके बाद यूजीसी 15 कार्यदिवस में अंतिम फैसला देगा। यदि किसी दस्तावेज की कमी होगी, तो आवेदक को उसे पूरा करने का समय मिलेगा।
अगर आवेदन खारिज हो जाता है, तो छात्र 30 कार्यदिवस में एक बार फिर से आवेदन की समीक्षा की मांग कर सकते हैं, जिसका निर्णय एक अलग समीक्षा समिति 10 कार्यदिवस में देगी और यूजीसी 15 कार्यदिवस में उसका अंतिम निर्णय देगा। यदि आवेदन स्वीकार हो जाता है, तो समकक्षता प्रमाण-पत्र ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जारी किया जाएगा।