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Premanand Maharaj: कितने पढ़े-लिखे हैं प्रेमानंद महाराज? पांचवी कक्षा से ही बढ़ गया था अध्यात्म की ओर झुकाव

Sat, 05 Apr 2025 04:27 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Premanand Ji Maharaj: उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर देशभर में भक्ति का संदेश फैलाने वाले प्रेमानंद जी महाराज का जीवन प्रेरणा से भरा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका असली नाम क्या है और उन्होंने कहां तक पढ़ाई की है।
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Premanand Ji Maharaj - फोटो : https://www.instagram.com/bhajanmarg_official/
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Premanand Ji Maharaj Education: भगवद् गीता के अर्थ को सरल शब्दों में समझाने और अपने जोश भरे प्रवचनों के लिए मशहूर वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज आज करोड़ों लोगों की आस्था और भक्ति का बड़ा सहारा हैं। लेकिन गुरुवार की रात जब उनके हजारों भक्त रात्रि पदयात्रा के लिए सड़क किनारे घंटों से इंतजार कर रहे थे, तो माइक से आई एक सूचना ने माहौल को भावुक कर दिया। बताया गया कि महाराजजी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, इसलिए वे आज पदयात्रा पर नहीं निकलेंगे। यह सुनते ही कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

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जहां एक ओर प्रेमानंद जी का वर्तमान भक्तिभाव से भरा है, वहीं उनका जीवन संघर्ष, त्याग और आत्मिक साधना की मिसाल भी है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इस आध्यात्मिक गुरु का असली नाम क्या था, उन्होंने कितनी शिक्षा प्राप्त की और क्यों उन्होंने इतनी कम उम्र में संन्यास का मार्ग चुना। आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें।

8वीं तक की पढ़ाई

प्रेमानंद जी महाराज की पढ़ाई-लिखाई गांव से ही हुई थी। बचपन से ही उनका माहौल पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ था। इसी कारण उनका रुझान भी धीरे-धीरे आध्यात्म की ओर बढ़ने लगा। बताया जाता है कि वे पांचवीं कक्षा से ही अपने पिता के साथ पूजा-पाठ में शामिल होने लगे थे।

हालांकि पढ़ाई भी साथ चल रही थी, लेकिन जब वे आठवीं पास कर 9वीं कक्षा में पहुंचे, तो उन्होंने पूरी तरह से आध्यात्मिक जीवन अपनाने का फैसला कर लिया। यह फैसला आसान नहीं था। उन्होंने सबसे पहले अपने परिवार को इसके बारे में बताया। मां को समझाना सबसे कठिन था, लेकिन प्रेमानंद जी ने धैर्य और विश्वास के साथ उन्हें भी मना लिया।

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प्रेमानंद जी महाराज का क्या है असली नाम?

प्रेमानंद जी महाराज के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में हुआ था। वे कानपुर के सरसौल ब्लॉक स्थित अखरी गांव के रहने वाले हैं। एक साधारण लेकिन धार्मिक परिवेश वाले ब्राह्मण परिवार में जन्मे प्रेमानंद जी का बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। उनके पिता का नाम शंभू पांडे और माता का नाम रामा देवी था। परिवार में पूजा-पाठ और भक्ति का माहौल शुरू से ही था। उनके पिता गहरी धार्मिक आस्था रखने वाले व्यक्ति थे और उनके दादा जी ने भी संन्यास का मार्ग अपनाया था। 
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