UGC: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए पीएचडी को अनिवार्य बनाने के अपने फैसले को पलट दिया है और कहा है कि पद पर सीधी भर्ती के लिए नेट, सेट और एसएलईटी जैसी परीक्षाएं न्यूनतम मानदंड होंगी।
यूजीसी के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने कहा कि सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति के लिए पीएचडी योग्यता वैकल्पिक बनी रहेगी। राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट), राज्य पात्रता परीक्षा (एसईटी) और राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा (एसएलईटी) सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए सहायक प्रोफेसर के पद पर सीधी भर्ती के लिए न्यूनतम मानदंड होंगे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी 2021 में कहा था कि विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर के पद के लिए पीएचडी डिग्री अनिवार्य करना वर्तमान शिक्षा प्रणाली में "अनुकूल नहीं" है। क्योंकि पीएचडी धारकों की संख्या भी कम है और नेट सेट स्लेट आदि क्वालीफाई करना आसान है। उन्होंने कहा था कि हमारा मानना है कि सहायक प्रोफेसर बनने के लिए पीएचडी की आवश्यकता नहीं है। यदि अच्छी प्रतिभाओं को शिक्षण की ओर आकर्षित करना है तो यह शर्त नहीं रखी जा सकती। हां, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के स्तर पर इसकी आवश्यकता है। लेकिन एक सहायक प्रोफेसर के लिए पीएचडी शायद हमारे सिस्टम में अनुकूल नहीं है और इसीलिए हमने इसे सुधार लिया है।