ओडिशा विश्वविद्यालय (संशोधन) अधिनियम 2020 को विधानसभा में पारित किया गया था, लेकिन विपक्ष ने आरोप लगाया कि कानून विश्वविद्यालयों की वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता को कम कर देगा और संस्थान राज्य सरकार के सीधे नियंत्रण में आ जाएंगे। इसके बाद यूजीसी ने अधिनियम को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी और शीर्ष अदालत ने इसके कार्यान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
इसके बावजूद समाजशास्त्र और वाणिज्य संकाय के लिए सहायक प्रोफेसरों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने पर एतराज जताते हुए यूजीसी के सचिव प्रोफेसर रजनीश जैन ने 25 मई को ओपीएससी और राज्य उच्च शिक्षा विभाग को अलग-अलग पत्रों में स्थगन आदेश का उल्लंघन करने पर चेताया। यूजीसी ने बताया कि शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए स्थगन आदेश के बावजूद, ओपीएससी ने समाजशास्त्र और वाणिज्य संकाय में सहायक प्रोफेसर के पद के लिए भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
हालांकि, ओडिशा लोक सेवा आयोग (OPSC) के सचिव अशोक दास ने कहा कि ओपीएससी को यूजीसी से अभी तक पत्र नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि आयोग भर्ती प्रक्रिया जारी रखे हुए है। उन्होंने कहा कि ओपीएससी इस संबंध में पत्र मिलने के बाद फैसला करेगी। वहीं, इस मुद्दे पर सेवानिवृत्त कुलपतियों और प्राध्यापकों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल गणेशी लाल से मुलाकात करेगा।