तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने गुरुवार को विधानसभा में बयान जारी करते हुए नीट से राज्य को छूट की मांग के मुद्दे पर 8 जनवरी, 2022 को सर्वदलीय बैठक की घोषणा की है। इस बैठक में नीट से छूट की मांग को लेकर अगले कदम पर चर्चा की जाएगी। इस संबंध में केंद्र सरकार के पास तमिलनाडु विधानसभा विधेयक लंबित है। गुरुवार को विधानसभा की कार्रवाई में मुख्यमंत्री ने इसकी जानकारी दी।
नियम 110 के तहत सदन के पटल पर एक बयान देते हुए, मुख्यमंक्षी स्टालिन ने विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से अपील की, जिनका विधानसभा में प्रतिनिधित्व है कि वे राज्य के छात्रों से संबंधित गंभीर मुद्दे पर अपना सहयोग दें। सभी राजनीतिक दल उन छात्रों के बारे में जरूर सोचें जो ग्रामीण इलाकों से हैं। नीट के खिलाफ सितंबर, 2021 में तमिलनाडू विधानसभा में सर्वसम्मति से विधेयक पारित किया गया था। जिसमें राज्य के छात्रों को नीट से छूट प्रदान की गई थी। इस विधेयक को याद करते हुए विधानसभा में सीएम स्टालिन ने कहा कि नीट के खिलाफ और सामाजिक न्याय के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा।
नीट ग्रामीण छात्रों के हितों के खिलाफ
सीएम स्टालिन ने दोहराया कि नीट ग्रामीण छात्रों के हितों के खिलाफ था। उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रवेश परीक्षा के माध्यम से राज्यों के अधिकारों को छीन लिया था कि राज्य किस तरीके से अपने मेडिकल प्रवेश की परीक्षा को आयोजित करेंगे। जबकि राज्य 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर मेडिकल में प्रवेश सुनिश्चित कर सकते हैं।
स्टालिन ने कहा कि पहले राज्यपाल को भेजा गया विधेयक राष्ट्रपति को नहीं भेजा गया था और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से राज्यपाल के साथ इस मामले को उठाया था, जिसके बाद बालू के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने नीट के खिलाफ एक ज्ञापन सौंपा था। नीट में छूट की मांग में देरी राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा हुई है और इससे छात्रों को नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि संबंधित प्रतिनिधित्व अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास है। तमिलनाडु राष्ट्रीय प्रवेश सह पात्रता परीक्षा (नीट) से छूट की मांग कर रहा है। राज्य में इस मुद्दे के भावनात्मक रंग हैं क्योंकि कथित तौर पर नीट परीक्षा पास नहीं कर पाने केे डर से कई उम्मीदवारों नेे आत्महत्या जैसा कदम उठाया था। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने राज्य में नीट प्रवेश परीक्षा को खत्म करने का फैसला किया था।