सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छह छात्रों द्वारा दायर उस रिट याचिका को खारिज कर दिया जिसमें राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी(एनटीए) द्वारा उनके नीट-यूजी ओएमआर स्कोरकार्ड से छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया था। याचिकाकर्ताओं ने यह आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था कि उत्तर कुंजी और अंतिम परिणामों के आधार पर गणना किए गए उनके अंकों में भारी अंतर है।
ओएमआर की प्रतियां उम्मीदवारों के ईमेल पर भेजी गई
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने रिट याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि एनटीए ने उम्मीदवारों को ओएमआर शीट दिखाई थी। एनटीए के वकील रूपेश कुमार ने पीठ को बताया कि उम्मीदवारों को एनटीए के कार्यालय में आमंत्रित किया गया था और उन्हें ओएमआर शीट का निरीक्षण करने की अनुमति दी गई थी। ओएमआर की स्कैन की गई प्रतियां उम्मीदवारों के ईमेल आईडी पर भी भेजी गई थीं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की ओएमआर उत्तर पुस्तिका में उनके और पर्यवेक्षक के हस्ताक्षर के साथ उनके मूल लेखन के बारे में बताया गया है। पीठ ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि %प्रथम दृष्टया यह नहीं कहाजा सकता है कि एनटीए के बैक ऑफिस में छेड़छाड़ या हेरफेर का कोई कार्य हुआ।
15.44 लाख उम्मीदवारों में से केवल छह ने ही शिकायत की
पीठ ने यह भी कहा कि नीट-यूजी परीक्षा में बैठने वाले 15.44 लाख उम्मीदवारों में से केवल छह ने ही यह शिकायत की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मनोज स्वरूप ने कहा कि उन्हें ओएमआर शीट को शारीरिक रूप से छूने की अनुमति नहीं थी क्योंकि बीच में एक कांच की दीवार थी। ओएमआर शीट को केवल छूकर ही सत्यापित किया जा सकता है। हालांकि पीठ ने उनकी दलीलों को मानने से इनकार कर दिया।
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