हमने नेपाल स्थित मैती नेपाल संगठन से संपर्क किया, जो लड़कियों को देह व्यापार के दलदल से निकालने का काम कर रहा था। लड़कियों को उसके बाद एक नया जीवन मिला। उस घटना के बाद मैंने और मेरे पति ने पूरी तरह से देह व्यापार में फंसी लड़कियों को बचाने के लिए काम करने का निर्णय लिया। मेरे पति ने मुझसे नौकरी करते रहने को कहा, ताकि पत्रकार के रूप में अधिक लड़कियों की मदद करने के लिए संपर्कों का उपयोग किया जा सके।
हमने अपनी सीमित क्षमता में लगभग तीन वर्षों तक काम किया। इसके बाद हमने मुंबई में मैती नेपाल की एक शाखा खोली, क्योंकि अधिकांश लड़कियां नेपाल से ही आई होती थीं। हम लड़कियों को छुड़ाते और एनजीओ को सौंप देते। इसके कुछ साल बाद रेस्क्यू फाउंडेशन का जन्म हुआ। कुछ साल बाद हमारे संगठन को एक इमारत दान में मिली, जिसे हमने आश्रय गृह बना दिया। आश्रय गृह बने कुछ ही दिन बीते थे कि मेरे पति की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। उन दिनों उन्हें बहुत धमकियां मिलती थीं, जिस कारण मैं टूट गई थी। पर इस धंधे में फंसी लड़कियों के बारे में सोचने के बाद मैंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
रेस्क्यू फाउंडेशन में सौ से ज्यादा सदस्य हैं, जिनमें अंडरकवर जांचकर्ताओं और मुखबिरों का एक समूह है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होने के नाते इसे सरकार से आर्थिक मदद मिलती है, जबकि थोड़ा बहुत काम करके हम स्वावलंबी होने की दिशा में काम कर रहे हैं। मेरा एक दत्तक पुत्र है, जिसकी मां ने एक वेश्यालय में उसे जन्म देने के बाद आत्महत्या कर ली थी। मेरे पति कहते थे कि, हम सभी को किसी दिन मरना होगा और इस बात पर कोई नियंत्रण नहीं होगा कि मौत कैसे होगी। मुझे इन लड़कियों के बीच सुकून मिलता है। उनके मुस्कराते चेहरे मुझे ताकत देते हैं।
(विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।)