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बरिस्ता ने नहीं दी फ्रैंचाइजी तो खोला श्रीनगर का सबसे खूबसूरत कैफे

Tue, 05 May 2015 03:50 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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जहां चाह, वहां राह। इस मुहावरे को कश्मीर के मीर मुनीब ने सच कर दिखाया है। मीर 23 साल के थे, जब उन्हें एक कैफे बनाने की
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प्रेरणा मिली। मीर ने बरिस्ता लवाजा की फ्रेंचाईजी लेने की सोची लेकिन उन्होंने फ्रेंचाईजी देने से इंकार कर दिया। मीर के अनुसार इस इनकार से उनके सपने को झटका लगा। लेकिन कुछ ही िददिनों बाद उन्होंने फिर एक सपना देखा और वो सपना अपने खुद के कैफे का था।

मीर ने अपने सपने का साकार करने के लिए बहुत मेहनत की। उन्होंने अपनी ही एक फास्ट फूड कैफे खोला। खास बात ये है कि मीर कश्मीर के कई लोगों को इस कैफे के जरिए रोजगार भी दे रहे हैं। मीर के कैफे में आपको कई सारे पकवान खाने को मिलेंगे। इनके कैफे में लाउंज भी है।
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कश्मीर की खूबसूरती से भरा है कैफे

मीर के कैफे की थीम कश्मीर की खूबसूरती है। कैफे की दीवारों पर लगी तस्वीरें जो कश्मीर की खूबसूरती को बयान करती हैं वो खुद उन्होंने ही क्लिक की है। कैफे में एक छोटी सी लाइब्रेरी भी है पुस्तक प्रेमियों के लिए काफी है। कैफे के लिये मीर ने श्रीनगर के सारा मॉल में 1050 स्क्वायर फीट जगह लेने के बाद इस कैफे के लिये दिन रात काम किया।

कड़ी मेहनत के बाद ये कैफे इस साल अप्रैल में तैयार हुआ। कैफे की विजिटर बुक में 99 प्रतिशत रिव्यू, कैफे खाने, जगह और हाइजीन के लिए पॉजिटिव है। मीर का कहना है कि उन्होंने कश्मीर के 9 लोगों को अपने यहां नौकरी दी है, ये उनकी सबसे बड़ी सफलता है।
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पैसो से ज्यादा जरूरी है सपने पूरा करना

मीर बताते हैं कि वो कैफे से फिलहाल ज्यादा नहीं कमा पा रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बात की खुशी है कि वो अपना सपना जी रहे हैं। जो पैसों से ज्यादा जरूरी है।

मीर के घर में अधितर लोग डॉक्टर हैं लेकिन वो अब एक ' चाय वाला' बन गए हैं। मीर अपनी सफलता का सारा श्रेय अपनी मां को देते हैं। वो बतातें हैं कि उनकी मां ने उन्हें 2 साल तक बहुत सपोर्ट किया। मेरा सपना सच करने के लिए उन्होंने मेरी बहुत मदद की।
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