जिज्ञासाओं को लेकर विशेषज्ञों से पूछे सवाल
बीएमसी द्वारा संचालित तिलक नगर स्कूल में आयोजित मेकर्स फैक्टरी कार्यक्रम में इन बच्चों के बनाए प्रोटोटाइप को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने 3डी प्रिंटिंग, आईओटी, क्लाउड और वेब सर्विस, रेस्पेबेरी पीआइ और अरुडिनो बोर्ड्स यानी मदरबोर्ड के बारे में अपनी जिज्ञासाओं को विशेषज्ञों से पूछा और उनसे सवाल-जवाब भी किए। कार्यक्रम में अटल इनोवेशन मिशन (Atal Innovation Mission) के निदेशक आर रामनाथन, आईआईटी बॉम्बे (IIT Bomaby) के एजुकेशन टेक्नोलॉजी विभाग के प्रमुख आर राजेंद्रन और समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) अभियान के स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर कैलाश पेगारे ने इस इनोवेशन का अवलोकन किया और काफी सराहा। इन बच्चों की इस गौरवपूर्ण यात्रा का साझेदार बना पी जैम फाउंडेशन जो कि सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर साइंस की शिक्षा और प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। इसके तहत बच्चों को कंप्यूटेशनल थिंकिंग, डिजाइन थिंकिंग और समस्याओं का समाधान करने की स्किल्स को डेवलप किया जा रहा है।
केंद्र सरकार 3000 गांवों में लगाएगी प्रोजेक्ट
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव नवीन कुमार शाह और नीति आयोग के सलाहकार आर कामाराजू ने वर्चुअल तरीके से हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि टैलेंट और स्किल्स का ऐसा प्रदर्शन और युवा भारतीयों के इनोवेशन को देखकर डिजिटल रेडी भारत का भविष्य काफी उज्ज्वल रहने की उम्मीद है। शाह ने कहा कि आठवीं कक्षा के बच्चों के बनाए पानी की बर्बादी को कम करने जैसे कुछ प्रोजेक्ट बहुत ही शानदार थे। हम 3000 गांवों में इस प्रोजेक्ट को लागू करने में खुशी होगी।
आत्मनिर्भर बन सकता है भारत
वहीं, कार्यक्रम में पहुंचे फ्रांसीसी आईटी कंपनी कैपजेमिनी के सीएसआर प्रमुख अनुराग प्रताप ने कहा कि जब मैं छात्रों से बात करता हूं तो कुछ चीजों पर विशेष रूप से ध्यान देता हूं। पहली ये कि क्या हम समस्याओं का समधान करने वाला देश बन सकते हैं? दूसरा ये कि क्या हम देश के युवाओं में इनोवेशन की आग पैदा कर सकते हैं? ये लाखों युवा जो आने वाले वक्त में कहीं काम करना शुरू करेंगे, सभी में कुछ खास बात है, जो यहां देखने को मिला। इन्होंने बड़ी समस्याओं की पहचान की और इस छोटी उम्र में तकनीक-आधारित समाधान और अन्य विचार पेश किए।