जगह की कमी से बढ़ते हैं ड्रॉपआउट
इस बारे में जिले के एक अधिकारी का कहना है कि 'स्कूलों में जगह की कमी बच्चों द्वारा पढ़ाई छोड़ने का एक बड़ा कारण है। अक्सर स्कूलों के भवन में जगह की कमी के कारण जूनियर्स को सीनियर्स के साथ बैठना पड़ता है। इससे सीनियर और जूनियर दोनों की पढ़ाई पर नकारात्मक असर होता है। अंततः वे स्कूल छोड़ देते हैं। इस तरह स्कूल ड्रॉपआउट की संख्या भी बढ़ती है।'
अधिकारी ने बताया कि बस में स्कूल का आइडिया एक सरकारी प्राथमिक स्कूल के छात्रों के लिए शुरू किया गया है। छात्रों को यह काफी पसंद भी आ रहा है। वह पहले से ज्यादा उत्सुकता के साथ कक्षाएं करने के लिए आ रहे हैं।
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लोहित के डिप्टी कमिश्नर प्रिंस धवन ने इस बारे में कहा कि इस पहल से न सिर्फ जगह की कमी की समस्या हल हुई है, बल्कि बच्चों के बीच खेल-खेल में सीखने की कला भी शुरू हुई है। अब अक्सर बच्चों को कक्षाओं के बाद भी यहां वक्त बिताते देखा जाता है।
जिला प्रशासन इस प्रयोग की सफलता को देखते हुए और भी बसों को कक्षाओं में बदलने की तैयारी कर रहा है।