प्लास्टिक बायोडिग्रेडेबल नहीं है और सदियों तक मिट्टी में रहता है। महासागरों में रोजाना प्लास्टिक खाने से सुमद्री जीव मर रहे हैं और उनकी प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं। अब मनुष्य द्वारा खाए जाने वाले भोजन में भी माइक्रो-प्लास्टिक पाया जा रहा है। पृथ्वी पर हमारा भविष्य गंभीर खतरे में है। कृपया मेरे भविष्य को बचाने के लिए सभी तरह के प्लास्टिक बैग के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में तत्काल कार्रवाई करें। मेरा दम घुट रहा है। कम्पोस्टेबल बैग समाधान नहीं हैं। कृपया हमें सही विकल्प प्रदान करें। कृपया, लुधियाना के पास मत्तेवाड़ा वन को बचाएं। कृपया गैलाथिया वन्यजीव अभयारण्य और ग्रेट निकोबार द्वीप को बचाएं। कृपया लक्षद्वीप में लागू किए जा रहे कानूनों को उलटने में मदद करें।
- अनन्या अग्रवाल, कक्षा-6 की छात्रा, अमृतसर
वहीं, दिल्ली से कक्षा 7वीं की छात्रा, अनाया खुराना ने प्लास्टिक के उपयोग के कारण हमारी पृथ्वी को होने वाले खतरों के बारे में ध्यान आकर्षित किया। अनाया ने लिखा -
प्लास्टिक हमारी धरती के लिए बहुत ही खतरनाक पदार्थ रहा है। यह एक ऐसा पदार्थ है जो हमारी धरती को नुकसान पहुंचा रहा है। यह मनुष्यों, पौधों और वन्य जीव सबके लिए हानिकारक है। हम कल्पना कर सकते हैं कि प्लास्टिक का उपयोग हमें कैसे प्रभावित कर रहा है। मेरा और मेरी धरती का दम घुट रहा है और हमें इन्हें बचाने की जरूरत है। हमें प्लास्टिक की थैलियों, बोतलों और प्लास्टिक से बनी अन्य सभी सामग्रियों पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है। हमें प्लास्टिक यों ही कहीं भी नहीं फेंकना चाहिए। हमें इनके रिसाइकलिंग के लिए और अधिक उपाय करने की आवश्यकता है। मेरा आप सभी से अनुरोध है कि सरकार से प्लास्टिक के इस्तेमाल, बोतल, प्लास्टिक बैग इधर-उधर फेंकने पर सख्त जुर्माना लगाने की अपील करें।
- अनाया खुराना, कक्षा 7वीं की छात्रा, दिल्ली
जबकि, अमृतसर के ही छठवीं कक्षा के छात्र कैरवबीर सिंह और शहराज सिंह संधू ने लिखा कि पृथ्वी पर हमारा भविष्य गंभीर खतरे में है। इसलिए हमें पर्यावरण बचाने के लिए आगे आना चाहिए। बकौल कैरवबीर -
प्लास्टिक की थैलियां धरती और जमीन को प्रदूषित कर रही हैं। प्लास्टिक खाने से जानवर मर रहे हैं और प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं। पृथ्वी पर हमारा भविष्य गंभीर खतरे में है। मेरा भी दम घुटता है। कृपया मत्तेवाड़ा वन क्षेत्र, गैलाथिया वन्यजीव अभयारण्य और ग्रेट निकोबार द्वीप को भी बचाएं। साथ ही लक्षद्वीप में लागू हो रहे प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले कानूनों को खत्म कराने में मदद करें।
- कैरवबीर सिंह, शहराज सिंह संधू , छात्र, अमृतसर