RRB NTPC क्या है पूरा मामला?
रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की ओर से नॉन टेक्नीकल पॉपुलर कैटेगरी (NTPC) भर्ती सीबीटी-1 परीक्षा 2021 में आयोजित की गई थी। यहां यह जानना बेहद अहम है कि परीक्षा में स्नातक और इंटर पास युवाओं के लिए एक समान पेपर आयोजित किया गया था। परीक्षा में लगभग सवा करोड़ से ज्यादा उम्मीदवारों ने भाग लिया था। सीबीटी-1 परीक्षा के रिजल्ट 14 व 15 जनवरी, 2022 को जारी किए गए थे। इसके बाद से ही युवाओं की नाराजगी देखने को मिल रही है।
सोशल मीडिया पर भी चलाया अभियान
सीबीटी-1 के परिणाम के आधार पर सीबीटी-2 यानी दूसरे चरण की परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाना है। उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है कि आरआरबी एनटीपीसी परिणाम में धांधली हुई है। आरआरबी एनटीपीसी सीबीटी-1 के परिणामों से खफा बेरोजगार उम्मीदवारों ने लगातार सोशल मीडिया पर एनटीपीसी स्कैम, RRB NTPC जैसे हैशटेग के साथ कैंपेन चलाया है।
RRB NTPC Recruitment 2019 में शुरू हुई थी प्रक्रिया
आरआरबी एनटीपीसी (RRB NTPC) भर्ती के लिए रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा 2019 में देश भर में 35 हजार पदों पर चयन प्रक्रिया शुरू करने के लिए अधिसूचना जारी की गई थी। इस भर्ती में विभिन्न ग्रेड की 13 भर्तियां शामिल हैं, जिसे सात स्लॉट में बांटा गया है।
20 गुना चयन का फॉर्मूला क्या है?
रेलवे भर्ती अधिसूचना के अनुसार, सीबीटी-1 और सीबीटी-2 परीक्षा के माध्यम से दो चरणों में क्रमश: 20 व आठ गुना उम्मीदवारों को क्वालीफाई किया जाना था। सीबीटी-1 के परिणाम में रेलवे भर्ती बोर्ड के अनुसार, 20 गुना उम्मीदवार क्वालीफाई घोषित किए गए हैं। जबकि उम्मीदवारों के अनुसार, सारे फसाद की जड़ यही है। जोन वाइज कुल पदों के 20 गुना अभ्यर्थियों को सीबीटी-1 में क्वालीफाई घोषित किया जाना था। लेकिन रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से विभिन्न स्लॉट में पदों की संख्या के आधार पर उनके 20 गुना अभ्यर्थियों को क्वालीफाई घोषित किया गया है।
RRB NTPC CBT-1 Result क्यों नाराज हैं प्रदर्शनकारी?
प्रदर्शनकारी बेरोजगार युवाओं का आरोप है कि आरआरबी एनटीपीसी भर्ती अधिसूचना के मुताबिक सीबीटी-1 स्क्रीनिंग परीक्षा है। इसके अंक मुख्य परीक्षा में नहीं जोड़े जाएंगे। जबकि इसे क्लीयर करने वाले को ही सीबीटी-2 परीक्षा में भाग लेने का मौका मिलेगा। चूंकि, पेपर स्नातक और इंटर पास के लिए एक समान स्नातक स्तर का आयोजित किया गया था। इसलिए, परिणाम में 2019 तक स्नातक कर चुके उम्मीदवारों का दबदबा ज्यादा रहा। अब ज्यादा अंक पाने वाले उम्मीदवार सभी स्लॉट की स्क्रीनिंग लिस्ट में चयनित हो गए। इससे बड़ी संख्या में एक ही उम्मीदवार का एक से अधिक स्लॉट में सीबीटी-2 के लिए चयन हो रहा है। जबकि वास्तविक हकदार उम्मीदवार को मौका नहीं मिल रहा।
इसके अलावा ग्रुप डी के लिए करीब 1.5 करोड़ अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। पहले इसी परीक्षा के आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया जाना था। हालांकि, अब रेलवे का कहना है कि उम्मीदवारों को एक और परीक्षा देनी होगी। इसमे सफल उम्मीदवारों का ही चयन किया जाएगा।
जारी किए गए परिणाम में एक ही उम्मीदवार का चयन कई पदों पर हुआ है। आखिर में चयनित उम्मीदवार किसी एक सीट को ही चुनेगा। ऐसे में वेटिंग लिस्ट वाले उम्मीदवार को रिक्त सीट पर नियुक्ति मिलनी चाहिए थी। हालांकि, रेलवे ने इसके लिए कोई भी व्यवस्था नहीं की।
विवाद पर रेलवे ने क्या कहा?
इस पूरे प्रकरण में रेलवे ने साफ किया है कि रिजल्ट तैयार करने में किसी प्रकार की धांधली नहीं हुई है। सीबीटी-2 के लिए 20 गुना फॉर्मूले के तहत सात लाख उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। आरआरबी ने बताया कि किसी एक उम्मीदवार ने एक से अधिक स्तर के लिए नामांकन किया था और उसे अच्छे अंक प्राप्त हुए तो वह एक से अधिक स्तर के लिए चयनित हो सकता है। इसलिए, सूची में नाम रिपीट हो सकते हैं, लेकिन नौकरी एक ही पद पर मिलेगी।
विवाद के बाद रेल मंत्रालय ने बनाई जांच कमेटी
जगह-जगह हुए हिंसक प्रदर्शनों के बीच, रेल मंत्रालय ने आगे की परीक्षाओं को टाल दिया है। इसके साथ ही एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो रेल मंत्रालय को रिपोर्ट करेंगी। समिति सभी उम्मीदवारों और हितधारकों से सुझाव लेगी और अपने सुझाव रिपोर्ट में देगी।