आईआईटी दिल्ली के बाद आईआईटी मद्रास है जो 20 स्थान ऊपर आया है और अब संयुक्त तौर पर 255वें स्थान पर है। यह 2017 के बाद से इसका सर्वोच्च रैंक स्थान है। वहीं, आईआईटी खड़गपुर को 280वां स्थान मिला है, जबकि आईआईटी गुवाहाटी ने संयुक्त 395वीं रैंक में पहली बार वैश्विक स्तर पर शीर्ष-400 संस्थानों में प्रवेश किया है। उधर, आईआईटी हैदराबाद 591 से 600वीं रैंक बैंड में बना हुआ है।
जेएनयू ने बनाई खास जगह
हालांकि, इस बार एक भारतीय विश्वविद्यालय ने भी क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में पदार्पण किया है, वह है जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), जिसने 561-570 रैंक बैंड में जगह बनाई है। रैंकिंग के अनुसार, भारत के 35 विश्वविद्यालयों में से 17 ने अपने सीपीएफ स्कोर में वृद्धि की है, जबकि 12 विश्वविद्यालयों की सीपीएफ में गिरावट देखी गई है। वहीं, जब फैकल्टी/छात्र अनुपात श्रेणी की बात आती है, तो कोई भी भारतीय विश्वविद्यालय शीर्ष 250 में शामिल नहीं है। कोविड-19 महामारी के बीच, भारत के 35 विश्वविद्यालयों में से 23 विश्वविद्यालयों को क्यूएस रैंकिंग के संकाय/छात्र अनुपात संकेतक में गिरावट का सामना करना पड़ा है।
एमआईटी नंबर-1, ऑक्सफर्ड दूसरे स्थान
जब विश्व रैंकिंग की बात आती है, तो मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को लगातार 10वें वर्ष को दुनिया के नंबर एक विश्वविद्यालय के रूप में चिह्नित किया। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने 2006 के बाद पहली बार दूसरा स्थान हासिल किया है, जबकि स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय तीसरे स्थान पर हैं।
ऐसे तैयार होती है क्यूएस रैंकिंग
क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग छह संकेतकों के आधार पर तैयार की जाती है। इनमें शैक्षणिक प्रतिष्ठा, नियोक्ता प्रतिष्ठा, प्रति संकाय उद्धरण, संकाय / छात्र अनुपात, अंतरराष्ट्रीय संकाय अनुपात और अंतरराष्ट्रीय छात्र अनुपात आदि शामिल हैं।