मौसम विज्ञान, सौर ऊर्जा, जनतांत्रिक मूल्य, आतंकवाद की मुखालफत, योग का प्रचार प्रसार, इन सभी क्षेत्रों में भारत की निर्णायक भूमिका रही है। इन क्षेत्रों में भारत पूरे विश्व को नई दिशा दे सकता है। भारत को आर्थिक महाशक्ति और विश्वगुरु बनाने की आधारशिला गुणवत्ता परक, नवाचारयुक्त, शिक्षा ही है। हम ऐसी नयी शिक्षा नीति ला रहे जो भारत केन्द्रित, मूल्यपरक, नवाचारयुक्त, रोजगारपरक, कौशलयुक्त, परिणाम आधारित शिक्षण, जीवनोपयोगी होगी।
यह नीति समाज और राष्ट्र निर्माण में उपयोगी होगी। प्राचीन काल से ही भारत में अध्ययन -अध्यापान की समृद्ध परम्परा रही है। तक्षशिला, विक्त्रस्मशिला, वल्लभी और नालन्दा विश्वविद्यालय ज्ञान के केंद्र रहे हैं। संपूर्ण एशिया से विद्यार्थी यहां अध्ययन करने के लिए आते थे। कालचक्र बदला और इसके साथ ही भारत का इतिहास भी बदला।
विदेशी आक्रांताओं ने भारत पर सदियों तक शासन किया और उन्होंने पूरी ताकत से भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक और चेतना की विरासत मिटाने का असफल प्रयास किया। हमारी हस्ती इसलिए नहीं मिटी क्योंकि हमारी जड़ें गहरी और कालजयी हैं। शाश्वत मूल्यों के आधार पर हम अपनी शिक्षा से ‘विश्वगुरु’ बनने की राह पर हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका में ब्लूमबर्ग को दिए एक साक्षात्कार में कहा था, ‘भारत की युवा प्रतिभा (यंग टैलेंट) लाभांश है और हम उन युवा प्रतिभाओं को निखारने के लिए कई प्रकार के जमीनी काम कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा था,‘ डिग्री से ज्यादा स्किल (कौशल) की जरूरत है और वह स्किल हर स्तर पर हो।’ भारत की कामकाजी जनसंख्या को रोजगार सक्षम कौशल से लैस करना बहुत जरूरी है।