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VP Dhankhar: एनईपी से बदलेगी भारत में शिक्षा की स्थिति; उपराष्ट्रपति धनखड़ ने विश्वविद्यालयों से की खास अपील

Mon, 23 Jun 2025 08:39 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

VP Dhankhar: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारत की सभ्यता से जुड़ी है और इसके लागू होने पर शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने विश्वविद्यालयों को नवाचार और विचार मंथन के केंद्र बनने का आह्वान किया।
 
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जगदीप धनखड़, उपराष्ट्रपति - फोटो : ANI (फाइल फोटो)
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विस्तार
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VP Dhankhar: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सोमवार को नोएडा की एक यूनिवर्सिटी में भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) द्वारा आयोजित कुलपतियों के 99वें वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए। यहां अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) भारत के शैक्षिक क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाली है, क्योंकि यह नीति देश की सभ्यतागत भावना, सोच और मूल्यों के अनुरूप है।

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उन्होंने कहा, "मुझे यह साझा करते हुए गर्व है कि तीन दशकों के बाद हमारे शिक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। मैं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की बात कर रहा हूं।"

उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल के रूप में उन्होंने इस नीति के निर्माण की प्रक्रिया को करीब से देखा है। धनखड़ ने कहा कि इस नीति को तैयार करने में लाखों लोगों के विचारों को शामिल किया गया। उन्होंने कहा, "यह नीति हमारी सभ्यतागत विरासत के मूल विचारों से जुड़ी है और इसके लागू होने के बाद यह पूरी शिक्षा प्रणाली को बदल देगी।" 

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विश्वविद्यालयों से किया ये आह्वान

उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालयों से सिर्फ डिग्रियां बांटने के बजाय समाज में बड़े बदलाव के प्रेरक केंद्र बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अकादमिक संस्थानों में असहमति, संवाद और बहस के लिए स्थान होना चाहिए।

उन्होंने कहा, "हमारे विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने के लिए नहीं हैं। जो डिग्रियां दी जाती हैं, उनमें गंभीरता और गुणवत्ता होनी चाहिए।"

धनखड़ ने कहा कि विश्वविद्यालयों को विचारों और नवाचार के केंद्र बनना चाहिए। “कुलपतियों और शिक्षाविदों पर बड़ी जिम्मेदारी है। बहस, संवाद और असहमति लोकतंत्र और हमारी सभ्यता की पहचान हैं। इन्हीं से मस्तिष्क सक्रिय होता है।”

उपराष्ट्रपति ने उच्च शिक्षा के समान वितरण पर जोर देते हुए ‘ग्रीनफील्ड संस्थानों’ की स्थापना की बात की। उन्होंने कहा, “हमारे कई संस्थान ब्राउनफील्ड यानी पुराने ढांचे पर आधारित हैं। हमें नए संस्थानों की जरूरत है, खासकर उन क्षेत्रों में जो अब तक उपेक्षित रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि कुलपति न केवल शिक्षा की गुणवत्ता के प्रहरी हैं, बल्कि शिक्षा के व्यापारीकरण के विरुद्ध एक मजबूत दीवार भी हैं। "हमारा प्रमुख उद्देश्य है - साधारण लोगों के लिए गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा को सुलभ, सस्ती और व्यापक बनाना।"

उपराष्ट्रपति ने शिक्षा को सबसे बड़ा समानता लाने वाला साधन बताया। उन्होंने कहा, "शिक्षा असमानताओं को मिटाती है। वास्तव में, यही लोकतंत्र को जीवित रखती है।"

धनखड़ ने जनसंघ के संस्थापक और भाजपा विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, "आज देश के महान सपूत डॉ. मुखर्जी का बलिदान दिवस है। यह दिन हमारे इतिहास में महत्वपूर्ण है।"

अपने भाषण के अंत में उपराष्ट्रपति ने नवोन्मेषी क्षेत्रों में उत्कृष्ट संस्थान स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन, क्वांटम साइंस, डिजिटल नैतिकता जैसे क्षेत्रों में यदि हम श्रेष्ठ संस्थान बनाएंगे, तो भारत अग्रणी बनेगा और बाकी दुनिया हमारा अनुसरण करेगी। यही चुनौती है।"

उन्होंने कहा, “शिक्षा केवल सामाजिक हित के लिए नहीं है, बल्कि यह भारत की सबसे रणनीतिक संपत्ति है। यह न केवल विकास यात्रा से जुड़ी है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी आधार है।”
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