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NEP 2020: केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा- हिंदी पर कोई दबाव नहीं, तमिलनाडु का विरोध असंवेदनशील और राजनीतिक

Sun, 02 Mar 2025 08:13 PM IST
शिवम गर्ग एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

NEP 2020: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एनईपी 2020 में हिंदी को थोपने का कोई प्रयास नहीं है, तमिलनाडु का विरोध राजनीतिक कारणों से है। उन्होंने बताया कि भारतीय भाषाओं की समान महत्ता है और तमिलनाडु में शिक्षा तमिल में होगी।
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धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री - फोटो : ANI
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विस्तार
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NEP 2020: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को स्पष्ट किया कि नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत हिंदी को राज्यों पर थोपने का कोई प्रस्ताव नहीं है और तमिलनाडु का विरोध "राजनीतिक कारणों" से है। प्रधान ने मीडिया कर्मियों से बात करते हुए कहा कि हमने एनईपी 2020 में यह कभी नहीं कहा कि केवल हिंदी होगी, हमने केवल यह कहा है कि शिक्षा को मातृभाषा पर आधारित किया जाएगा। तमिलनाडु में यह तमिल भाषा होगी।
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यह बयान शिक्षा मंत्री ने तमिलनाडु सरकार और केंद्र के बीच नई शिक्षा नीति और तीन-भाषा नीति को लेकर हो रहे विवाद के बीच दिया है। 

सभी भाषाओं को समान महत्व

प्रधान ने कहा कि मैं कुछ लोगों के राजनीतिक उद्देश्यों पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता। एनईपी 2020 का उद्देश्य भारत की विभिन्न भाषाओं को बढ़ावा देना है, चाहे वह हिंदी हो, तमिल, ओडिया, पंजाबी हो या और कोई। सभी भाषाओं को समान महत्व दिया गया है। तमिलनाडु में कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन यह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है।
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तीसरी भाषा को थोपने की कोई आवश्यकता नहीं- स्टालिन

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने शुक्रवार को कहा था कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में स्कूलों में तीसरी भाषा को थोपने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि उन्नत अनुवाद तकनीक पहले ही भाषा की बाधाओं को तुरंत हटा देती है। छात्रों को अतिरिक्त भाषाओं का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।

डीएमके नेता स्टालिन ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) उत्तर भारत में सभी से हिंदी जानने की उम्मीद करती है "चाय खरीदने, पानी पुरी खाने या शौचालयों का उपयोग करने के लिए…"
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