इधर, रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल जारी
नीट पीजी काउंसलिंग 2021 में जारी देरी के लिए लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है। काउंसलिंग में देरी के कारण देश भर में डॉक्टरों और छात्रों पर दवाब बढ़ता ही जा रहा है। इस कारण से रेजिडेंट डॉक्टरों ने फिर से हड़ताल शुरू कर दी है। उनकी मांग है कि नीट पीजी काउंसलिंग की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए।
दिल्ली में राम मनोहर लोहिया, सफदरजंग और लेडी हॉर्डिंगे अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल को फिर से शुरू कर दिया है। अस्पतालों में इमरजेंसी समेत सभी स्वास्थय सेवाएं रोक दी गई है। डॉक्टरों ने इस हड़ताल के पीछे अस्पतालों में कम डॉक्टर और नीट पीजी काउंसलिंग 2021 में लगातार होती देरी को जिम्मेदार बताया है। डॉक्टरों की हड़ताल को फेडरेशन ऑफ रेसिडेंट डॉक्टर असोसिएशन (फोर्डा) का समर्थन प्राप्त है।
क्या कहते हैं डॉक्टर
हड़ताल करने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के कारण पहले से ही उन पर काम का बहुत अधिक बोझ है, अस्पताल पहले से ही कम डॉक्टर की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके बाद नीट पीजी काउंसलिंग 2021 में देरी के कारण एक सत्र बर्बाद हो जाएगा। इससे उनपर और दवाब बढ़ेगा।
25 अक्टूबर को शुरू होनी थी नीट पीजी की काउंसलिंग
नीट पीजी काउमसलिंग 25 अक्टूबर 2021 से शुरू होनी थी। लेकिन कुछ छात्र नीट में शुरू हुई दो आरक्षित श्रेणियों - 27 फीसद ओबीसी - नॉन क्रीमी लेयर और 10 फीसद गैर आरक्षित वर्गों के लिए शुरू हुई ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर) के इस वर्ष लागू होने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय चले गए थे। न्यायालय ने इस मामले का हल न निकलने तक काउंसलिंग पर रोक लगा दी। यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है और इस मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी 2022 को होनी है। इस कारण से अब तक काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।
आधा वर्ष बर्बाद, छात्र परेशान
करियर के लिहाज से ऐसे कई मेडिकल के छात्रों में भी तनाव नजर आने लगा है। ऐसे कई छात्रों का कहना है कि उनका आधा वर्ष बर्बाद हो चुका है। 11 सितंबर 2021 को नीट की परीक्षा हुई थी। इसके परिणाम 28 सितंबर 2021 को आ गए थे। नतीजे आए हुए अब पूरे दो महीने गुजर चुके हैं। ऐसे में वह भी बहुत परेशान हैं।