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NEET Age Limit: हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी- पात्रता उम्र में कुछ दिन कम पड़े तो उसे अयोग्यता न माना जाए

Wed, 08 Sep 2021 07:22 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Madras High Court on NEET age limit: इसी तरह के एक मामले में 2019 में न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम की अध्यक्षता वाली आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ के एक आदेश का हवाला देते हुए, न्यायमूर्ति पुष्पा सत्यनारायण और न्यायमूर्ति कृष्णन रामासामी की वर्तमान पीठ ने मंगलवार को यह टिप्पणी की।
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NEET 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई में कहा कि निर्धारित आयु योग्यता के लिए कुछ दिनों की कमी एक बुद्धिमान छात्र के लिए नीट जैसे प्रवेश परीक्षा में शामिल होने में बाधा नहीं होनी चाहिए। मद्रास हाई कोर्ट ने नीट परीक्षा आवेदन से जुड़ी एक याचका पर सुनवाई के दौरान कहा कि पात्रता उम्र में कुछ दिन कम पड़े तो उसे अयोग्यता नहीं माना जाए, विशेषकर बुद्धिमान विद्यार्थियों के लिए। इसी तरह के एक मामले में 2019 में न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम की अध्यक्षता वाली आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ के एक आदेश का हवाला देते हुए, न्यायमूर्ति पुष्पा सत्यनारायण और न्यायमूर्ति कृष्णन रामासामी की वर्तमान पीठ ने मंगलवार को यह टिप्पणी की। हालांकि, इसने एक नाबालिग लड़की को NEET परीक्षा में भाग लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। 

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हाईकोर्ट ने स्वीकारा, ऐसा नहीं होना चाहिए
पीठ ने कहा कि 2019 के आदेश में कहा गया है कि "हम अपनी चिंता दर्ज करना चाहेंगे कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को ऐसे मामलों पर फैसला करना चाहिए, क्योंकि जिन व्यक्तियों की उम्र कुछ दिनों से कम हो जाती है, वे वास्तव में छोटे नहीं हो सकते हैं। उन्हें कम उम्र का न माना जाए। किसी व्यक्ति को कम उम्र का मानने की अवधारणा उन व्यक्तियों पर लागू हो सकती है, जो किसी विशेष समय पर सीमा पूरा नहीं कर सकते थे, या जो किसी विशेष समय पर इंटरमीडिएट पूरा नहीं कर सकते थे, और यह आवश्यक आयु का नियम, उन मामलों पर लागू नहीं किया जा सकता है, जहां उम्मीदवारों ने व्यापक रूप से बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन कुछ दिनों की कमी के कारण पात्रता नियम पूरा नहीं कर पाए।”

यह है पूरा मामला

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मूल रूप से, तंजावुर जिले की नाबालिग लड़की श्रीहरिनी ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के इस साल 09 अगस्त के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसमें उसे रविवार 12 सितंबर को होने वाली नीट परीक्षा में बैठने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। एकल न्यायाधीश याचिकाकर्ता को बैंगलुरु में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (NIMHANS) के समक्ष पेश होने और खुद को IQ विश्लेषण के अधीन करने के निर्देश के साथ याचिका का निपटारा किया और यदि वह NEET UG 2021 परीक्षा में उपस्थित होने के लिए योग्य है, तो वह हो सकती है परीक्षा में बैठने की अनुमति दी। इससे क्षुब्ध होकर एनटीए ने तत्काल अपील दायर की।

उम्र में छूट के अनुरोध को खारिज करने का कोई औचित्य नहीं

इसकी अनुमति देते हुए और एकल न्यायाधीश के आदेश को पलटते हुए, वर्तमान पीठ ने कहा कि लड़की को कक्षा 07 से कक्षा 09 तक दोहरी पदोन्नति दी गई थी और उसे 14 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले ही 10वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी और यहां तक कि 12वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए, जबकि वह 16 वर्ष से कम उम्र की थी, तो भी सीबीएसई द्वारा कोई आपत्ति नहीं जताई गई। पीठ ने कहा, इसलिए, जब लड़की को सीबीएसई ने 16 साल की उम्र से पहले ही 12वीं की बोर्ड परीक्षा पूरी करने की अनुमति दी थी, तो हमें लगता है कि एनटीए की ओर से उम्र में छूट के उनके अनुरोध को खारिज करने का कोई औचित्य नहीं हो सकता है।

नियम ही बन गए अड़चन
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हालांकि, चूंकि नियम विशेष रूप से एक बार तय कर दिए जाते हैं, इसलिए यह अदालत इसे रद्द नहीं कर सकती है। इसके अलावा, रिट याचिकाकर्ता को नीट के लिए बैठने की अनुमति देने से ऐसे आवेदकों का पिटारा खुल जाएगा और इस देश की अदालतें ऐसे ही दावों से भर जाएंगी। इसके अलावा, यह तर्क देने के अलावा कि रिट याचिकाकर्ता का आईक्यू स्तर उच्च है और उसने सभी आईक्यू परीक्षणों में बौद्धिक रूप से बेहतर श्रेणी में प्रदर्शन किया है, उसके वरिष्ठ वकील ने मामले में एक अलग दृष्टिकोण लेने के लिए कोई अन्य वैध आधार नहीं उठाया, पीठ ने कहा।
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