चिकित्सा शिक्षा पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा या नीट परिणाम 2021 को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी या एनटीए द्वारा 01 नवंबर, 2021 को जारी किया गया था। लेकिन इसमें फिजिक्स विषय की उत्तर कुंजी यानी आंसर की को कुछ छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस चुनौती याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। याचिका पर सुनवाई तीन न्यायाधीशों की पीठ कर रही थी, जिसमें जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस विक्रम नाथ शामिल हैं।
दरअसल, NEET UG परीक्षा के लिए उपस्थित हुए 22 छात्रों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। छात्रों द्वारा दायर याचिका के अनुसार, भौतिकी के प्रश्न-पत्र का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद करते समय एक गलती के कारण, 'Amplitude of Current' यानी 'वर्तमान का आयाम' शब्द किया गया था। इस प्रकार, उम्मीदवारों ने विसंगति के साथ-साथ भौतिकी प्रश्न-पत्र में पेटेंट त्रुटि को चुनौती दी।
नीट आंसर की के अनुवाद में गलती होने का किया था दावा
उम्मीदवारों के अनुसार, प्रश्न-पत्र में हिंदी में प्रयुक्त शब्द 'धारा के आयाम' 'Amplitude of Current' को संदर्भित नहीं करता है। इस प्रकार उम्मीदवारों ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी या एनटीए से राहत मांगी। इसके अलावा, उम्मीदवारों ने नए सिरे से परीक्षा और परिणाम जारी करने की मांग की। उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिका में कहा गया है, कि एनटीए ने उक्त त्रुटि का संज्ञान लिए बिना, केवल प्रश्न के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर एक उत्तर कुंजी जारी की, जिससे हिंदी भाषी उम्मीदवारों को अंग्रेजी बोलने वाले समकक्षों की तुलना में नुकसान की स्थिति में डाल दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बना था पैनल
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन स्वतंत्र विशेषज्ञों के पैनल की राय को ध्यान में रखते हुए याचिका को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी, एनटीए द्वारा गठित पैनल में आईआईटी, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला के प्रोफेसर शामिल थे।
नीट यूजी आंसर की 2021 में सही जवाब थे : विशेषज्ञ पैनल
पैनल ने सिफारिश की कि हिंदी और अंग्रेजी दोनों संस्करणों के लिए उत्तर समान थे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उल्लेख किया, तीनों ने सहमति व्यक्त की है कि चाहे हम अंग्रेजी लें या हिंदी, उत्तर वही रहता है। उन्होंने कहा कि यहां "धारा" का कोई महत्व नहीं था।