निजी मेडिकल कॉलेजों के फीस निर्धारण मामले की सुनवाई अब 14 सितंबर को होगी। इस सिलसिले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस दिया और फीस कम करने पर जवाब तलब किया है।
यूपी के निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की एमबीबीएस, बीडीएस की सीटें इस बार नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) से भरी जा रही हैं। काउंसलिंग प्रक्रिया जारी है। इसी बीच फीस का विवाद खड़ा हो गया। दरअसल, राज्य सरकार ने 50 फीसदी स्टूडेंटोें की सालाना फीस 36-36 हजार रुपये निर्धारित कर दी। वहीं, 50 फीसदी स्टूडेंटों की सालाना फीस दोगुनी बढ़ा दी। मान लिजिए किसी कॉलेज सालाना फीस 8 लाख रुपये थी तो उनकी फीस 16 लाख रुपये हो गई। इसका मेडिकल कॉलेज ओनर्स एसोसिएशन ने विरोध किया और हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। इस मामले की सुनवाई लगातार चल रही है। कानपुर और फर्रुखाबाद के मेडिकल, डेंटल कॉलेजों के प्रबंधकों का कहना है कि फीस कम करने का सटीक कारण राज्य सरकार को बताना होगा। इस मुद्दे पर हाईकोर्ट ने नोटिस दिया है। मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी। इस तारीख पर राज्य सरकार को अपना पक्ष रखना होगा।