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NCF 2023: अब साल में दो बार ऑन डिमांड बोर्ड परीक्षा देने का मिल सकता है विकल्प, एनसीएफ का पूर्व मसौदा जारी

Fri, 07 Apr 2023 07:26 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शिक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, यह एनसीएफ-एसई का पूर्व मसौदा है, जिसपर अभी नेशनल स्टीयरिंग कमेटी में कई दौर का विचार विमर्श बाकी है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) के तहत राष्ट्रीय पाठ्यचर्या फ्रेमवर्क (एनसीएफ) के शुरुआती मसौदे में साल में दो बार बोर्ड परीक्षा का मौका देने की सिफारिश की है। इसमें छात्र अपनी तैयारी और मांग के आधार पर बोर्ड परीक्षा में शामिल हो सकता है।

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इसरो के पूर्व चेयरमैन के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति ने मसौदा जारी कर सभी हितधारकों के सुझाव मांगे हैं। शिक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, यह एनसीएफ-एसई का पूर्व मसौदा है, जिसपर अभी नेशनल स्टीयरिंग कमेटी में कई दौर का विचार विमर्श बाकी है। अलग-अलग क्षेत्रों के साझेदारों के सुझाव एनएससी को विभिन्न बदलावों और दृष्टिकोणों के बारे में समालोचनात्मक रूप से विचार करने में मदद करेंगे।

बयान में कहा गया है कि स्कूली शिक्षा के विभिन्न चरणों में छात्रों की विविध जरूरतों, कई शैक्षणिक दृष्टिकोणों और सीखने व शिक्षण सामग्री को देखते हुए छात्रों, माता-पिता, शिक्षकों, शिक्षकों के प्रशिक्षकों, विशेषज्ञों, विद्वानों और पेशेवरों के सुझाव आवश्यक हैं। अधिकारियों ने बताया कि नए एनसीएफ के हिसाब से तैयार किताबें अगले साल से पढ़ाई के लिए उपलब्ध होंगी।
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10वीं, 12वीं के परीक्षा परिणाम में पिछली कक्षा के अंक भी जुड़ सकते हैं
इस ड्रॉफ्ट रिपोर्ट के मुताबिक, 10वीं और 12वीं कक्षा के अंतिम परिणाम में पिछली कक्षा के अंकों का भी मूल्यांकन कर जोड़ा जा सकता है। इसके आधार पर बच्चों के पास परीक्षा देने का पर्याप्त समय और मौके उपलब्ध होंगे। बच्चे जब भी खुद को तैयार पाएंगे, वे परीक्षा की मांग रख सकते हैं। इसके लिए व्यापक स्तर पर बोर्ड को प्रश्नों का बैंक तैयार करना होगा और परीक्षा के समय उपयुक्त सॉफ्टवेयर की मदद ली जाएगी।

शिक्षा मंत्रालय ने 5 + 3 + 3 + 4 'पाठ्यचर्या और शैक्षणिक' संरचना के आधार पर चार राष्ट्रीय पाठ्यचर्या फ्रेमवर्क (एनसीएफ) तैयार किए हैं, जिन्हें नई शिक्षा नीति-2020 ने स्कूली शिक्षा के लिए अनुशंसित किया है। मंत्रालय ने 3 से 8 साल के बच्चे के लिए नींव चरण का एनसीएफ पिछले साल अक्तूबर में जारी किया था। इसी नीति के तहत स्कूली शिक्षा के लिए एनसीएफ तैयार किया गया है।

विभिन्न श्रेणियों में ये विषय होंगे शामिल
ह्यूमैनिटीज में भाषा, साहित्य व दर्शन की पढ़ाई होगी, जबकि समाज विज्ञान में इतिहास, भूगोल, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र की और विज्ञान में भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान की पढ़ाई करनी होगी। वहीं, गणित और कंप्यूटिंग में गणित, कंप्यूटर विज्ञान, बिजनेस गणित और कला में संगीत, नृत्य, थियेटर, चित्रकला, वोकेशनल में कौशल विकास के कोर्स, स्पोर्ट्स में गेम्स, योगा की जानकारी मिलेगी।

पहली कक्षा से किताब शुरू होंगी
बेशक अब नर्सरी, केजी, एलकेजी स्कूली शिक्षा का भाग होगी। लेकिन पहली कक्षा में छात्र पहली बार किताब देखेंगे। पहली और दूसरी कक्षा के छात्र सिर्फ दो किताब भाषा व गणित पढ़ेंगे। पहली से पांचवी कक्षा तक औपचारिक परीक्षा की बजाय असेसमेंट होगा।

अभिभावक, बच्चे और शिक्षक भेजें सुझाव
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आधार पर राष्ट्रीय पाठ्यचर्या फ्रेमवर्क का ड्रॉफ्ट सार्वजनिक कर दिया गया है। अभिभावक, बच्चे और शिक्षक इसे पढ़कर अपने सुझाव भेज सकते हैं। छात्रों को तनावमुक्त , गुणवत्तायुक्त शिक्षा मुहैया करवाना हमारा मुख्य मकसद है। -धर्मेंद्र प्रधान, शिक्षा मंत्री, भारत सरकार

अब 12वीं नहीं 9वीं से भविष्य बनाने में मिलेगी मदद
अब छात्र को कक्षा नौवीं से अपने भविष्य को लेकर तैयारी शुरू करनी होगी। उसे सभी विषयों के बारे में पढ़ाया जाएगा, ताकि वह 12वीं के बाद किस क्षेत्र में भविष्य बनाना है,उसमें उलझन न हो। मसौदे में 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं को सेकेंडरी स्टेज में रखते हुए दो भागों में बांटा गया है। इसमें कई बड़े बदलाव हो सकते हैं। कक्षा 10वीं को पूरा करने के लिए छात्रों को कक्षा नौंवी और 10वीं के दो वर्षों में कुल आठ-आठ पाठ्यचर्या क्षेत्रों में से प्रत्येक से दो आवश्यक पाठ्यक्रम पूरे करने होंगे। उदाहरण के तौर पर अभी 10वीं बोर्ड परीक्षा के छात्रों को कम से कम पांच विषयों की पढ़ाई करनी होती है, लेकिन नई सिफारिश में आठ विषयों को अनिवार्य किया जा सकता है।

11वीं में भविष्य के आधार पर तीन क्षेत्रों में से एक चुनने का विकल्प
मेडिकल, इंजीनियरिंग क्षेत्र में भविष्य बनाने को लेकर अक्सर छात्र तनाव में रहते हैं। इसी कारण महंगी कोचिंग के बाद भी छात्र असफलता के डर से अपना जीवन समाप्त कर देते हैं। इन्हीं दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए नौंवी कक्षा से 12वीं कक्षा के कोर्स को इस तरह से डिजाइन करने की सिफारिश की गयी है, दसवीं कक्षा तक विभिन्न विषयों को पढ़ने और विस्तार से जानने के बाद उसे 11वीं कक्षा में तीन विकल्प मिलेंगे। पहले विकल्प में ह्यूमैनइटीज, सोशल साइंस, साइंस, मैथमेटिक्स और कंप्यूटिंग विषय होंगे। दूसरे में इंटरडिसिप्लिनरी एरिया ऐसे बच्चों के लिए स्नातक के बाद रिसर्च एरिया में भविष्य बनाना चाहते होंगे। तीसरे वर्ग में ऑटर्स, स्पोर्ट्स और वोकेशनल को चुनने का विकल्प मिलेगा।

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