अनदेखी के कारण नहीं हुआ था अधिसूचना में उल्लेख
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पिछले साल अपने सिलेबस रेशनलाइजेशन के रूप में ओवरलैपिंग और अप्रासंगिक कारणों का हवाला देते हुए पाठ्यक्रम से कुछ हिस्सों को हटा दिया था जिनमें गुजरात दंगों, मुगल कोर्ट, आपातकाल, शीत युद्ध, नक्सल आंदोलन आदि थे।
एनसीईआरटी ने पिछले साल कक्षा 11वीं की पाठ्यपुस्तक से हटाए गए पैराग्राफ की घोषणा नहीं की थी। हालांकि, एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश सकलानी ने दावा किया कि बदलाव को नई शिक्षा नीति की कवायद के दौरान मंजूरी दी गई थी और आधिकारिक अधिसूचना में इसका उल्लेख अनदेखी के कारण नहीं हुआ था।
सांप्रदायिक हिंसा कैसे फैलती गई?
कक्षा 11वीं की समाजशास्त्र की पाठ्यपुस्तक में अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी शीर्षक से हटाए गए पैराग्राफ में बताया गया है कि कैसे वर्ग, धर्म और जातीयता अक्सर आवासीय क्षेत्रों में अलगाव का कारण बनती है। इसी में 2002 में गुजरात में हुई सांप्रदायिक हिंसा का हवाला दिया गया था कि कैसे सांप्रदायिक हिंसा फैलती गई।
उस पैराग्राफ में बताया गया था कि शहरों में लोग कहां और कैसे रहेंगे यह एक ऐसा प्रश्न है जिसे सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान के माध्यम से भी फिल्टर किया जाता है। दुनिया भर के शहरों में लोगों को हमेशा वर्ग विशेष द्वारा अलग किया जाता है और अक्सर नस्ल, जातीयता, धर्म और कर्म आदि पहचान आधारित आवासीय क्षेत्र बनाए जाते हैं।
दंगों पर आधारित घटनाओं का कालक्रम भी बाहर
परिषद ने कक्षा 12वीं की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में स्वतंत्रता के बाद से भारत में राजनीति शीर्षक वाले अध्याय में दंगों पर आधारित पूरे दो पृष्ठ हटाए हैं। पहले पृष्ठ में घटनाओं का कालक्रम था और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा हिंसा को नियंत्रित करने में विफल रहने के लिए गुजरात सरकार की आलोचना का उल्लेख किया गया था।
दूसरे पन्ने में दंगों पर तीन अखबारों की रिपोर्टों का एक कोलाज बना था, साथ ही दंगों से निपटने के लिए गुजरात सरकार की 2001-2002 की वार्षिक रिपोर्ट से NHRC की टिप्पणियों का एक अंश भी था। इस खंड में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध राज धर्म वाली टिप्पणी को भी हटाया गया है।
अन्य समुदायों के लोगों को मारने, बलात्कार और लूटने का जिक्र
वहीं, कक्षा 12वीं की समाजशास्त्र की पाठ्यपुस्तक में एनसीईआरटी ने सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्र-राज्य शीर्षक वाले खंड के तहत एक पैराग्राफ हटा दिया था, जिसमें बताया गया था कि कैसे सांप्रदायिकता लोगों को अपने गौरव और क्षेत्र की रक्षा के लिए अन्य समुदायों के लोगों को मारने, बलात्कार करने और लूटने के लिए उकसाती है।
नए शैक्षणिक सत्र के लिए कक्षा 12वीं की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में गुजरात दंगों के संदर्भ के अलावा गांधीजी के निधन का देश में सांप्रदायिक स्थिति पर जादुई प्रभाव, गांधी की हिंदू-मुस्लिम एकता की खोज और आरएसएस को प्रतिबंधित करने की बात को भी हटाया गया है।