दुनियाभर में इंजीनियरिंग क्षेत्र में आ रहे बदलावों, पर्यावरण परिवर्तन और बढ़ते तापमान को ध्यान में रखते हुए भारत भी अपने छात्रों को तैयार करेगा। इसके लिए राष्ट्रीय प्रमाणन बोर्ड (एनबीए) वाशिंगटन करार के तहत ग्रेजुएट एट्रीब्यूट्स एंड प्रोफशनल कंपीटेंसी (जीएपीसी-4) का चौथा सुधार करने जा रहा है। इसके तहत बीटेक करने के बाद कितने छात्रों को रोजगार मिला, इंडस्ट्री उनके क्षमताओं से खुश है या नहीं जैसे पहलुओं का मूल्यांकन होगा। इंडस्ट्री से मिली प्रतिक्रिया पर सभी आईआईटी और एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेजों के पाठ्यक्रम, पढ़ाने के तरीके, परीक्षा, प्रशिक्षण में बदलाव किया जाएगा।
आईआईटी के पास भी एनबीए की मान्यता नहीं
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में शुमार 23 आईआईटी के कोर्स को भी अभी एनबीए की मान्यता प्राप्त नहीं है। इसलिए वाशिंगटन एकॉर्ड के सदस्य देश अक्सर आईआईटी स्नातकों की नौकरी पर सवाल उठा देते हैं।
अभी सिर्फ 15 फीसदी के पास मान्यता
अभी एआईसीटीई के सिर्फ 15 फीसदी इंजीनियरिंग कॉलेजों के कोर्स एनबीए से मान्यता प्राप्त हैं, जबकि सरकार का लक्ष्य इसे 100 फीसदी हासिल करना है। इस साल एआईसीटीई ने कॉलेजों को थोड़ी राहत दी है, लेकिन आने वाले समय में जिनके कोर्स एनबीए से मान्यता प्राप्त नहीं होंगे, उन्हें बंद कर दिया जाएगा।